247 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 247 “गैरकानूनी तरीके से अनिवार्य राशि के लिए आदेश प्राप्त करना” (Illegally obtaining decree for an amount not owed)। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
Also Read: क्या कहती है BNS की धारा 244, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें
धारा 247 क्या कहती है? BNS Section 247 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 247 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 247 उन व्यक्तियों पर कार्रवाई करता है जो धोखाधड़ी के माध्यम से अदालत से कोई निर्णय या आदेश हासिल करते हैं या उसे लागू करवाते हैं।
जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ ऐसी राशि के लिए निर्णय लेता है जो वास्तव में देय नहीं है, या किसी ऐसी राशि के लिए आदेश प्राप्त करता है जो निर्धारित राशि से अधिक है, तो वह इस धारा के अंतर्गत आता है। इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति किसी संपत्ति या उसके हिस्से के लिए भी निर्णय प्राप्त करता है, जिसका उन्हें वास्तविकता में अधिकार नहीं है, तो वे भी इसी श्रेणी में शामिल होंगे।
BNS 247 Important Points
- यह धारा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 210 का स्थान लेती है।
- यह प्रावधान उन परिस्थितियों पर लागू होता है जहां कोई व्यक्ति न्यायालय के आदेश या statement का गलत इस्तेमाल करके अनुचित लाभ हासिल करने की कोशिश करता है।
- यह प्रावधान उन व्यक्तियों के लिए है जो धोखाधड़ी से प्राप्त डिक्री या आदेश का लाभ लेते हैं या ऐसे आदेशों को धोखाधड़ी से लागू कराते हैं।
- यह धारा एक संतुलित संरचना structure प्रस्तुत करता है, जो जांचों का निपटारा न्यायिक और प्रभावी तरीके से करने की अनुमति देती है।
Also Read: क्या कहती है BNS की धारा 243, जानें इससे जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण बातें
बीएनएस धारा 247 की और सजा
इसके अलवा आपको बता दें कि BNS की धारा (Section) 247 के तहत दोषी पाए जाने पर सजा का प्रावधान है कि, दोषी व्यक्ति को निम्नलिखित सजा दी जा सकती है…. वही किसी भी प्रकार की अवधि के लिए जिसे दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। साथ ही उसे पाँच हजार रुपये तक का जुर्माना। इसके अलवा कारावास (Imprisonment)) और जुर्माना (Fine Charges) दोनों हो सकते हैं।



