असम ST दर्जा विवाद, 6 समुदायों के भविष्य पर 21 दिसंबर को CCTOA लेगा बड़ा फैसला

Assam ST Status, ST status for 6 communities in Assam
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Assam ST Status: हाल ही में असम से खबर सामने आई हैं। जहाँ पर काफी समय से ST कास्ट की 6 कम्युनिटी (ताई अहोम, चुटिया, मोरान, मोटोक, कोच-राजबोंगशी और चाय बागान की जनजातियों) को शेड्यूल ट्राइब (ST) का दर्जा देने की दशकों पुरानी मांग एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। जिसे लेकर असम सरकार द्वारा राज्य विधानसभा में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स (GoM) की रिपोर्ट पेश करने के बाद, अब गेंद असम के आदिवासी संगठनों की कोऑर्डिनेशन कमेटी (CCTOA) के पाले में है। 21 दिसंबर को इस पूरे मुद्दे के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण तारीख माना जा रहा है।

21 दिसंबर को क्या होने वाला है?

बीते दिन असम के CCTOA (Coordination Committee of Tribal Organizations of Assam) की बैठक में GoM (Group of Ministers) रिपोर्ट का एनालिसिस करने के लिए 10 सदस्यों का एक ‘Advisory Group’ बनाया है। जिसमे एक एहम फैसला लिया गया। जिसमे  इस हाई-प्रोफाइल कमेटी की पहली मीटिंग 21 दिसंबर, 2025 को होनी है। ध्यान देने वाली बात है कि इस मीटिंग में GoM रिपोर्ट की सिफारिशों पर डिटेल में चर्चा की जाएगी।

दूसरी और कमेटी यह जांच करेगी कि इन छह समुदायों को ST (शेड्यूल्ड ट्राइब) का दर्जा देने से मौजूदा आदिवासी समुदायों के अधिकारों, नौकरियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर कोई नेगेटिव असर पड़ेगा या नहीं। इसके बाद कमेटी अपनी राय बनाएगी, जिसे सरकार के साथ होने वाली अगली चर्चाओं में पेश किया जाएगा।

हाई-प्रोफाइल कमेटी का नेतृत्व कौन कर रहा है?

लेकिन ये सबसे बड़ा सवाल ही कि इस हाई प्रोफाइल कमेटी का नेतृत्व कौन कर रहा हा तो बताते चलते है कि इस महत्वपूर्ण कमेटी की कमान अनुभवी हाथों में सौंपी गई है..जिसकी अगुवाई सुहास चकमा (NHRC के NGO कोर ग्रुप के सदस्य और मानवाधिकार विशेषज्ञ) कर रहे हैं। वही इस पैनल में सेवानिवृत्त IAS और ACS अधिकारी, कानूनी विशेषज्ञ और स्वायत्त परिषदों (Autonomous Councils) के प्रतिनिधि शामिल हैं, उनके अलावा, पैनल में राज्य के कई प्रतिष्ठित सेवानिवृत्त अधिकारियों और नेताओं को जगह दी गई है।

GoM की रिपोर्ट में क्या है? (तीन-श्रेणी फार्मूला)

इस मामले को लेकर असम सरकार के मंत्रियों के समूह ने एक ‘बीच का रास्ता’ निकालने की कोशिश की है, जिसे ‘थ्री-टियर स्ट्रक्चर’ कहा जा रहा है.जिसे तीन भागो में बंटा जा सकता हैं। जिसमे  ST (Plains) – मौजूदा मैदानी जनजातियां, ST (Hills) – मौजूदा पहाड़ी जनजातियां और  ST (Valley) –  यह एक नई श्रेणी प्रस्तावित की गई है, जिसमें इन 6 समुदायों (ताई अहोम, चुटिया, आदि) को रखने की सिफारिश है।

CCTOA के साथ एक एग्रीमेंट करने की कोशिश

वही CCTOA और अन्य पुराने जनजातीय संगठनों का मानना है कि राज्य स्तर पर श्रेणियों में बांटने के बावजूद, केंद्र सरकार और राष्ट्रीय स्तर पर ये सभी एक ही ‘ST लिस्ट’ में आएंगे, जिससे पुराने आदिवासियों का कोटा कम हो सकता है।इसके अलावा, आपको बता दें, कि 21 दिसंबर को मीटिंग के बाद, सरकार CCTOA के साथ एक एग्रीमेंट करने की कोशिश कर रही है ताकि इस रिपोर्ट को फाइनल करके केंद्र सरकार (गृह मंत्रालय) को भेजा जा सके। शेड्यूल्ड ट्राइब (ST) का दर्जा देने का आखिरी अधिकार संसद के पास है। अगर असम के सभी समुदाय और राज्य सरकार सहमत हो जाते हैं, तो केंद्र सरकार के लिए ज़रूरी कानून बनाना आसान हो जाएगा।

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