तांबे से बनी विश्व की सबसे बड़ी प्राचीन मूर्तियों में एक सुल्तानगंज की ताम्र मूर्ति
By: Shikha
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सुल्तानगंज की बुद्ध प्रतिमा (Sultanganj Buddha) भारतीय कला और धातु विज्ञान का एक अद्भुत नमूना है।
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यह प्रतिमा गुप्त काल और उत्तर-गुप्त काल (लगभग 5वीं से 7वीं शताब्दी) के दौरान निर्मित की गई थी।
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जिसे भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहा जाता है। यह गुप्त कला और पाल राजवंश के बीच के संक्रमण काल की शैली को दर्शाती है।
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यह प्रतिमा शुद्ध तांबे से बनी है और इसे 'लुप्त मोम' (Lost Wax) विधि द्वारा ढाला गया है।
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यह प्राचीन भारत की उन्नत धातुकर्म तकनीक का सबसे उत्कृष्ट और विशाल जीवित प्रमाण है।
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यह मूर्ति शुद्ध तांबे (ताम्र) से बनी है और इसकी ऊँचाई लगभग 7.5 फीट (करीब 2.3 मीटर) है, जो इसे अत्यंत विशेष बनाती है। इसका वजन 500 किलोग्राम से अधिक है।
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मूर्ति में भगवान बुद्ध खड़े हुए हैं और उनका दाहिना हाथ 'अभय मुद्रा' (निर्भयता का प्रतीक) में है, जबकि बायां हाथ वरदान देने की मुद्रा में नीचे की ओर है।
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उनके शरीर पर पारदर्शी वस्त्र (चीवर) को बहुत ही बारीकी से दिखाया गया है, जो सारनाथ शैली की विशेषता है।
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इसकी खोज 1861 में बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में रेलवे निर्माण के दौरान हुई थी।
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वर्तमान में यह भारत में नहीं, बल्कि इंग्लैंड के बर्मिंघम संग्रहालय और कला दीर्घा में सुरक्षित रखी गई है।