Top 5 Dalit news: जब दलितों को अपने लिए छोटे से लेकर बड़े मुद्दे को लेकर न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है, तो फिर भला क्यों है ये कानून व्यवस्था, और कैसे न्यायालय की नजरों में अब एक हुआ। दलितों की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि अब तो न्याय की लड़ाई से पहले ही डर लगता है कि कहीं कोई उन्हें नुकसान न पहुंचा दें।
मेरठ में 60 घंटे बाद बरामद हुई अपहृत युवती
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ से है जहां दलित महिला की हत्या करके उसकी 20 साल की लड़की का अगवा करने का मामला काफी बड़ा मुद्दा बना गया है। एक और पुलिस ने करीब 60 घंटे के बाद अपहृत लड़की और आरोपी पारस राज को हरिद्वार से बरबाद किया है तो पारस ने बयान दिया है कि रूबी अपनी मर्जी से भागी थी और अपनी मां पर हमला भी उसी ने किया था। लेकिन रूबी के बयान ने सारा खेल बदल दिया, खबरों की माने तो रूबी ने बयान दिया है पारस ने उसके सामने उसकी मां पर हमला किया था, और उसे धमकी दी कि अगर उसके साथ नहीं बैठी तो उसपर भी हमला कर देगी।
उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसकी मां इस हमले से मारी जाएंगी। रूबी के बयान के बाद रविवार को ही विशेष अदालत ने पारस को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। वहीं रूबी को फिलहाल वन स्टॉप सेंटर यानी कि आशा ज्योति केंद्र भेज दिया गया है। पुलिस इस मामले में बहुत सख्ती से जांच कर रही है, ऐसे में सवाल ये उठता है कि कहीं ऐसा न हो कि दवाब के रूबी को अपने बयान से पलटने पर मजबूर होना पड़े।
मेरठ में दलित महिला की हत्या के मामले में चंद्रशेखर आजाद का बयान
2, दलित से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है। उन्होंने मेरठ पुलिस की तमाम कोशिशों के बाद भी पीड़ित परिवार से मिलने के लिए सारी हदें पार कर दी। सोशल मीडिया पर आजाद के वीडियो लगी तेजी से वायरल हो रहे है जिसमें वो सड़को पर भागते हुए, तो कभी अकेले ही बाइक से तो कभी कच्ची सड़कों पर तेजी से चलते नजर आ रहे है।
पुलिस ने काफी कोशिश की कि आजाद पीड़ित परिवार से न मिल पाए लेकिन आजाद ने भी हार नहीं मानी। वहीं अब आजाद का बयान भी सामने आया है जिसमें उन्होंने ये डर जताया है कि कहीं ऐसा न हो कि पुलिस और आरोपी के दवाब में आने के कारण रूबी अपने बयान से न बदल जाएं, क्योंकि अगर ऐसा होता है तो इतने दिनों से लड़ी जाने वाले दलितों की ये लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी। हालांकि रूबी पर किसी तरह का दबाव न बने इसीलिए उसे घरवालों से दूर रखा गया है जिस पर हर वक्त निगरानी रखी जा रही है।
जातिवादी वकील अनिल मिश्रा का नया खेल
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर से है जहां जातिवादी वकील अनिल मिश्रा जेल की हवा खाने के बाद भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, अब तक बाबा साहब का नाम मिटाने के लिए तमाम हथकंडे अपनाने वाला अनिल मिश्रा जब बाबा साहब के नाम को कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाया तो अब वो सीधा SC St ACT के खिलाफ ही मोर्चा खोल रहा है। उसने बयान दिया है कि वो अब मध्य प्रदेश में ही नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश में भी अपनी लड़ाई लड़ेगा। अनिल मिश्रा ने कहा कि ग्वालियर से पैदल यात्रा SC-ST एक्ट (काले कानून) को खत्म कराने के लिए शुरू करेंगे ओर उनका पहला पड़ाव यूपी का हाथरस होगा।
हैरानी की बात है कि कोर्ट की चेतावनी के बाद भी SCST एक्ट को रद्द करने के लिए पैदल यात्रा करने के लिए तैयार है। वहीं दलित समाज ने भी अनिल मिश्रा की हरकतों पर चुटकी लेते हुए कहा कि अगर वो एक वार्ड का चुनाव भी लड़ेगा तो उसे जनता उसकी औकात दिखा देगी। सच तो ये है कि उसे दलितों और ब्राह्मणों के मुद्दे से कुछ लेना देना नहीं है, उसे तो केवल जाति के नाम पर हंगामा करके सुर्खियों में रहना है, ताकी राजनीति में उसकी राह आसान हो जाए। एक बार वो राजनीति के आ गया तो यही अनिल मिश्रा जनता को लुभाने के लिए बाबा साहब के गुणगान गाते नजर आएगा। वैसे आपको क्या लगता है क्या वाकई में अनिल मिश्रा अब मजाक का मुद्दा बनता जा रहा है, हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
कोलकाता हाईकोर्ट का बड़ा बयान
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला कोलकाता से है, जहां अभी कुछ दिनों पहले कोलकाता हाई कोर्ट ने ही फैसला सुनाया था कि अगर जातिसूचक गालियां पब्लिक प्लेस पर नहीं दी गई है तो उसे एससीएसटी एक्ट के दायरे में भी रखा जाएगा, वहीं अब कोलकाता हाई कोर्ट ने आदिवासी समाज के लिए एक और फैसला सुनाया है। दरअसल हाई कोर्ट ने इस बात को स्वीकार किया है कि अगर कोई किसी को आदिवासी या संथाली बुलाता है तो वो जातिगत भेदभाव माना जाएगा, और वो एससीएसटी एक्ट के दायरे में आएगा।
हालांकि इस तरह से शब्दों का इस्तेमाल पब्लिक प्लेस पर होना चाहिए जहां कुछ लोगों ने इस तरह से कमेंट को सुना हो, अगर ये भी सार्वजनिक तौर पर नहीं कहा गया है तो इसे अपमान नहीं माना जाएगा। कोलकाता हाई कोर्ट ने पहले ही दलितों और पिछड़ों के लिए एकांत में किए जा रहे जातिसूचक टिप्पणियां को गलत और अपराधिक करार देने से इनकार कर दिया और अब आदिवासी समाज के लिए इस तरह का फैसला देकर आखिर कोलकाता हाई कोर्ट करना क्या चाहती है। कहीं ऐसा तो नहीं कि कोर्ट के इस फैसले में जातिगत भेदभाव को सही करार दिया जा रहा है, क्योंकि ऐसा होता है तो फिर दलितों को अपमान और उनके साथ अत्याचार कभी कम ही नहीं होगा।
मानसिक रूप से कमजोर दलित महिला के साथ दुष्कर्म
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के हुबाली से है, जहां एक मानसिक रूप से कमजोर दलित महिला के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। ये घटना हुबाली के बागलकोट जिले के संगम क्रॉस की है, पीड़िता के भाई ने पुलिस थाने में तहरीर दी है कि उसकी 40 साल की बहन तलाकशुदा है और उसकी मानसिक हालात ठीक नहीं है। वो ऐसे ही गांव में इधर उधर घूमती रहती थी, लेकिन शनिवार की शाम को वो झाड़ियों में फैंकी हुई थी। पास के राहगीरो ने उसे देखा और पीड़िता के बारे में उसके भाई को जानकारी दी थी, जिसके बाद उसने हुनगुंड पुलिस थाने में इस मामले की तहरीर दी।
वहीं पुलिस ने पीड़िता को तालुक अस्पताल में भर्ती कराया है, इलाज के बाद उसका बयान लिया जायेगा, वहीं मेडीकल की रिपोर्ट सामने आने के बाद दुष्कर्म की पुष्टि हो जायेगी। वहीं बागलकोट SP सिद्धार्थ गोयल ने भी बताया कि इस मामले में पीड़िता इस वक्त जिला अस्पताल में एडमिट है, उसके होश में आने के बाद उसका बयान लिया जायेगा, वहीं पुलिस ने घटनास्थल के पास मौजूद सीसीटीवी कैमरे को खंगालना शुरु कर दिया है, और फुटेज के आधार पर 72 संदिग्धों की लिस्ट तैयार की गई है। जल्द ही आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।



