Rajasthan Assembly Session: राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली (Tika Ram Jully) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने अभिभाषण को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि इसमें जमीनी हकीकत का प्रतिबिंब नहीं है। जूली ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी जानबूझकर सदन की कार्यवाही में व्यवधान पैदा कर रही है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बना रही है।
“माइक को जानबूझकर बंद कर…” – टीकाराम जूली
जूली ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा में पहली बार कोई दलित नेता प्रतिपक्ष बना है, जिसे बीजेपी स्वीकार नहीं कर पा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में बोलने नहीं दिया जाता और उनके माइक को जानबूझकर बंद कर दिया जाता है।
सर्वदलीय बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए जब टीकाराम जूली ने कहा कि बीजेपी लगातार उन्हें कमजोर करने की कोशिश करने में लगी रहती है। उनका कहना है कि सदन के भीतर बीजेपी विधायक शोर-शराबा करके विपक्ष को उकसाने की कोशिश करते हैं और फिर माहौल बिगाड़कर कार्यवाही रुकवा देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी संवाद से बच रही है और किसी तरह की सार्थक बैठक या चर्चा के लिए आगे नहीं आ रही।
बता दें नेता प्रतिपक्ष जूली ने यह भी कहा कि विधानसभा जैसे मंच पर जटिल मुद्दों का समाधान हमेशा बातचीत और आपसी सहमति से होता रहा है, लेकिन मौजूदा स्थिति में संवाद की कमी साफ दिखाई दे रही है। उनका कहना था कि बीजेपी का रवैया ऐसा है कि विपक्ष को बोलने का अवसर ही न दिया जाए।
सवाल पूछने से रोका
नेता प्रतिपक्ष ने बीजेपी पर उनके पद के प्रति असम्मानजनक व्यवहार का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जैसे ही वे सदन में खड़े होते हैं, उन्हें बैठाने की कोशिश की जाती है और सवाल पूछने से रोका जाता है, जबकि लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है।
जूली के इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्मा गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीजेपी सत्ता के अहंकार में लोकतांत्रिक परंपराओं की अनदेखी कर रही है। वहीं, इन आरोपों पर बीजेपी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लगातार हंगामे और आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह स्पष्ट है कि सियासी तनाव बढ़ता जा रहा है। अब यह देखना बाकी है कि सरकार और विपक्ष के बीच संवाद बहाल होता है या सदन की कार्यवाही पर इसी तरह असर पड़ता रहेगा।
सरकार के दावों पर उठें सवाल
इससे बाद बुधवार (28 जनवरी) को राज्यपाल के अभिभाषण पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अभिभाषण को तथ्यों से परे बताते हुए कहा कि इसमें जमीनी हकीकत का प्रतिबिंब नहीं है। जूली ने तंज कसते हुए कहा कि अभिभाषण के दौरान कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा मुस्करा रहे थे, मानो उन्हें भी स्थिति की सच्चाई का अंदाजा हो। उन्होंने सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और ईआरसीपी जैसे मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।
कांग्रेस नेता ने कानून-व्यवस्था और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा। उनका कहना था कि समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं हो पाई है और प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है। ‘लखपति दीदी’ योजना के लिए दिए गए 270 करोड़ रुपये के ऋण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के दावे और वास्तविकता में बड़ा अंतर है।
कांग्रेस विधायकों ने किया पैदल मार्च
बजट सत्र के पहले दिन विपक्ष ने मनरेगा का नाम बदलने और ‘राइट टू वर्क’ के अधिकार के कमजोर होने का मुद्दा भी उठाया। जूली और पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने फावड़ा, गैंती और तगारी लेकर पैदल मार्च किया। जूली ने आरोप लगाया कि मजदूरों के काम के अधिकार को कमजोर किया जा रहा है और मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण कानून को निष्प्रभावी करने की कोशिश हो रही है।
परिसीमन के मुद्दे पर भी उन्होंने बीजेपी को घेरा। जूली के मुताबिक, परिसीमन की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं की जा रही और लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बाड़मेर के कुछ हिस्सों को बालोतरा में जोड़ दिया गया है, जिससे दूरी 70 किलोमीटर से बढ़कर 170 किलोमीटर हो गई है।



