दलितों के लिए जातिगत भेदभाव की पीड़ा तो सदियों पुरानी है, लेकिन अब तो सिर से छत छीनकर उनके वजूद पर ही हमला किया जा रहा है। विकास के नाम पर उनके दशकों पुराने आशियाने उजाड़े जा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण वारंगल की चेराबंडा राजू नगर कॉलोनी है, जहां दलितों के घरों पर बुलडोजर चलाने की कोशिश की जा रही है।
जानें क्या है पूरा मामला?
तेलंगाना के वारंगल में भद्रकाली मंदिर के पास स्थित चेराबंडा राजू नगर कॉलोनी में रहने वाले दलित परिवारों के घर गिराने के आरोप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बीआरएस एमएलसी दासोजू श्रवण ने राज्य सरकार की कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे बर्बर और गैर-संवैधानिक बताया है।
दलित परिवारों का आशियाना छीनने की कोशिश
BRS नेता दासोजू श्रवण का कहना है कि कॉलोनी में रहने वाले परिवार पिछले 60-70 साल से रह रहे है, लेकिन अब विकास परियोजनाओं और मॉडल सड़कों के नाम पर बिना नोटिस दिए उनके घरों को गिराने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे बुलडोजर राज बताया है।
मानवाधिकार आयोग में शिकायत
बीते बुधवार को श्रवण, पूर्व चीफ व्हिप दस्यम विनय भास्कर और बीआरएस लीगल सेल के सदस्यों के साथ प्रभावित परिवारों को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग पहुंचे। वहां उन्होंने आयोग के चेयरमैन जस्टिस शमीम अख्तर को औपचारिक शिकायत सौंपी। श्रवण के अनुसार बताया जा रहा है कि आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भरोसा दिलाया कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएंगे और 9 मार्च को मामले की समीक्षा की जाएगी।
पानी और बिजली काटने की धमकी का आरोप
श्रवण ने आरोप लगाया कि परिवारों को घर खाली कराने के लिए पानी और बिजली कनेक्शन काटने की धमकी दी जा रही है। उनका कहना है कि पानी की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
प्रशासन से जवाब नहीं मिलने की शिकायत
उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों ने जिला कलेक्टर और कमिश्नर को कई बार ज्ञापन दिया, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसी वजह से उन्हें मानवाधिकार आयोग का सहारा लेना पड़ा।
संगठनों से एकजुट होने की अपील
श्रवण ने तेलंगाना के दलित और आदिवासी संगठनों से अपील की कि वे ऐसे मामलों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाएं। साथ ही प्रशासन से आयोग के आदेशों को लागू करने और प्रभावित परिवारों के अधिकारों व सम्मान की रक्षा करने की मांग की। वारंगल में दलित परिवारों के घर गिराने के आरोप का मामला अब मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने मामले पर निर्देश जारी करने और जल्द समीक्षा करने का भरोसा दिया है।



