बाबा साहब को कई मुहाने पर जातिवादी ताकतो का विरोध झेलना पड़ा था.. यहीं विरोध एक कारण था जब उन्होंने संसद में कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था..
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लेकिन क्या आप ये जानते है कि बाबा साहब की कुछ अधूरी इच्छाये भी थी.. जिन्हें वो पूरा करना चाहते थे।
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लेकिन उनकी अचानक हुई मृत्यु के कारण वो इच्छाएं हमेशा के लिए अधूरी रह गई। तो चलिए जानते है...
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बाबा साहब ने जब संविधान का निर्माण किया था तब उसके लागू होने के बाद उन्हें संविधान में कई लूपहोल नजर आये. जिसमें वो प्रावधान करना चाहते थे..
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दलितो को अलग निर्वाचन क्षेत्र न दिला पाना
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प्रेस को आजाद मौलिक अधिकार में शामिल करना- बाबा साहब जानते थे कि आज नहीं तो कल प्रेस का इस्तेमाल ताकतवर लोग अपने मतलब के लिए कर सकते है.
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संविधान के अनुच्छेद 17 में बाबा साहब ने अस्पृश्यता यानि कि छुआछूत को खत्म करते हुए उसे कानून अपराध की श्रैणी में रखा था..
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बाबा साहब की मृत्यु अचानक हुई थी, उनकी मृत्यु के बाद उनकी अंतिम किताब बुद्ध एंड हिज धम्मा छपी थी जो नवयान बौद्ध परंपरा वालो के लिए उनकी पवित्र ग्रंथ के समान है।