IPC 376 बनाम BNS 64: बलात्कार के मामलों में कितना बदला कानून और कितनी सख्त हुई सजा?

BNS Section 36, BNS Section 36 In Hindi
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जब 1 जुलाई 2024 में आईपीसी की धाराये बदल कर बीएनएस में बदली गई है, तब से धाराओं में केवल नंबर ही नहीं बदले बल्कि नियम भी बदले गए.. इन्ही में से एक है बीएनएस की धारा 64… जो कि बलात्कार जैसे गंभीर मामलों के लिए तैयार किया गया है। ये इंडियन पीनल कोड  की धारा 376 की जगह पर लागू की गई है.. लेकिन कुछ बड़े बदलावों के साथ.. आईये जानते है कि क्या बदलाव हुए है बीएनएस की धारा 64 में.. और ये पुराने आईपीसी की धारा 376 से कैसे और कितना अलग है।

क्या है भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 का मतलब

भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 भारत में बलात्कार जैसे गंभीर मुद्दों में सजा के लिए इस्तेमाल होती है। किसी महिला के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाना, जिसमें महिला की मंजूरी न हो, ऐसे में इस अपराध को बलात्कार कहा जायेगा.. ऐसे मुद्दे में सजा के लिए अब धारा 64 के अनुसार अपराधी को सजा दी जायेगी।

बीएनएस 64 के तहत सजा के लिए 2 उपधाराये

उपधारा 2- हम पहले बार करेंगे उपधारा 2 के बारे में, जिसके अनुसार यदि कोई व्यक्ति सत्ता, विश्वास या अधिकार के पदों पर रहते हुए जिसमें, कोई पुलिस अधिकारी, लोक सेवक यानि कि ऐसे सरकारी अधिकारी और कर्मचारी जो लोक सेवा के लिए नियुक्त किये गए हो लेकिन अपने पद का फायदा उठा कर वो किसी महिला के साथ यौन उत्पीड़न करता है, तो गंभीर अपराध की श्रैणी में रखा जायेगा, इसके अलावा सशस्त्र बलों या सेना के जवान, या सेना के जुड़े उच्च अधिकारी हो, जो अपने पद का फायदा उठा कर किसी महिला का शारीरिक शोषण करें, या फिर जेल के अधिकारी अपनी जेल में कैद किसी महिला का शोषण करें।

महिला व बाल संस्थानों के कर्मचारियों द्वारा अपराध हो, महिलाओं और बच्चों को देखभाल और सुरक्षा प्रदान करने वाले संस्थानों के अधिकारी हो, अस्पताल के डाक्टर या अन्य स्टाफ हो, गर्भवती महिला के साथ बलात्कार हो, दोस्त या रिश्तेदार द्वारा बलात्कार किया जाना, मानसिक रुप से बीमार महिला के साथ बलात्कार किया जायें, या फिर हिंसा के दौरान महिलाओं के साथ बलात्कार जैसी घटना को अंजाम दिया जाये तो ये गंभीर अपराधों की श्रैणी में ही रखे जायेंगे।

बीएनएस 64 की उपधारा 1

वहीं बीएनएस 64 की उपधारा 1 बताती है कि उपधारा 2 में जो भी कैटेगरी बताई गई है अगर इन कैटेगरी में उपधारा हुआ है तो अपराधी को कठोर कारावास और जुर्माना भुगतना होगा। वहीं धारा 63 में भी ये साफ कहा गया है कि यदि 12 साल से कम उम्र की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया जाता है तो आरोपी को फांसी की सजा देने तक का प्रावधान है।

वहीं अपराध कैसे किया गए है, जिसे बीएनएस 64 के अंतर्गत माना जायेगा, इसके बारे में भी बताया गया है। जैसे कि किसी महिला को नशीली दवा देकर फायदा उठाना, महिला को जान से मारने की धमकी देकर, या हथियार दिखा कर रेप करना, अपने पद को रौब दिखा कर, झांसा देकर रेप करना, किसी को असंवैधानिक तरीके से पकड़ कर कैद में दुष्कर्म करना, शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करना, सामूहिक बलात्कार, महिला का बलात्कार करके उसे वीडियो बना कर ब्लैकमेल करना, धारा 64 के अंतर्गत अपराधों की श्रैणी में रखा जाता है।

सजा देने के लिए भी दो अलग अलग कैटेगरी

आपको बता दें, वहीं धारा 64 में अपराधियों को सजा देने के लिए भी दो अलग अलग कैटेगरी बनाई गई…

1 धारा 64(1) के तहत सजा का प्रावधान- ये धारा बताती है कि उपधारा 2 में बताए लोगों और परिस्थितियों को छोड़ कर दुष्कर्म किया जाता है, तो आरोपी को कम से कम 10 साल की सजा का प्रावधान है, जिसे उम्रकैद तक बढ़ाया जा सकता है, वहीं दोषी पर भारी जुर्माना भी लगाया जाता है।

2, धारा 64(2) कहता है कि अगर कोई 64(1) में बताये गए धारा के तहत दोषी पाया जाता है, जो कि बलात्कार के गंभीर रूपों को दर्शाते है तो धारा 64(1) में दी गई सजा से ज्यादा सजा दी जाने का प्रावधान है। साथ ही 12 साल की कम उम्र की लड़की के साथ अपराध में दोषी पाया गया तो उसे सजा ए मौत तकक हो सकती है।

सरकार ने धारा 376 की ही तरह बीएनएस की धारा 64 में भी बलात्कार को एक गंभीर अपराध माना है इसलिए इस धारा में जमानत का प्रावधान ही नहीं है, यानि की ये एक गैर जमानती अपराध है और इसके अंतर्गत चलने वाले मामले में या तो दोषी होगा या निर्दोष। जमानत नहीं होगी।

महिलाओं के साथ अपराध को रोकने के लिए कई कोशिशे की जा रही है, सख्त कानून बनाये जा रहे है। राहत की बात ये है कि इन मामलों में अब 45 से 90 दिनों के भीतर ही सुनवाई हो रही है, जिससे न्याय मिलने की उम्मीद और बढ़ गई है। आप बीएनएस की धाराओं और उनके नियमों को लेकर क्या सोचते है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

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