Sleeping Buddha Thailand: भारत से करीब 4200 किलोमीटर दूर बसे थाईलैंड में बौद्ध धर्म ( Buddhism in Thailand) को मानने वालों की आबादी 90% से ज्यादा है. यहां काफी बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु (Buddhist monk) हैं और लाखों की संख्या में यहां बौद्ध विहार बने हुए हैं. बौद्ध धर्म की रंग में रंग चुका यह देश है तो एशिया में…लेकिन इस देश की सोच और यहां का रहन सहन काफी हद तक पश्चिमी सभ्यता से प्रेरित लगता है. इसी थाईलैंड में अब बौद्ध मंदिर में एक ऐसा खजाना मिला है, जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. तो चलिए आपको इस लेख में थाईलैंड में Sleeping Buddha के नीचे मिले बेशकीमती खजाने के बारे विस्तार से बताते हैं जो 1300 सालों से वहां दबा हुआ था.
1300 साल पुरानी द्वारवती सभ्यता – Sleeping Buddha Thailand
उत्तरी थाईलैंड के फेमस नाखोन रत्चासिमा (Famous Nakhon Ratchasima) प्रांत के वाट थम्माचक सेमारम मंदिर (Wat Thammachak Semaram Temple) में 13 मीटर की एक भगवान बुद्ध की प्रतिमा है, जो लेटी हुई अवस्था में है. यह प्रतिमा कई दशकों से इसी अवस्था में है लेकिन तब शायद किसी ने ये नहीं सोचा होगा कि इस ऐतिहासिक प्रतिमा के नीचे 1300 साल पुरानी द्वारवती सभ्यता के जमाने की धरोहर हो सकती है.
दरअसल, यहां पर भगवान बुद्ध की मूर्ति के नीचे रोज की तरह मजदूर पानी लेने गए थे. उसी दौरान उन्हें मूर्ति के एक मीटर नीचे एक बड़ा मिट्टी का बर्तन दिखा…जब उसे खोला गया तो उसमें से 1300 साल पुरानी द्वारवती सभ्यता की 33 चीजें मिली. इन धरोहरों में सोने की अंगूठियां, चांदी की बालियों और कांसे के कंगन शामिल हैं. वहीं, थाइलैंड की ललित कला विभाग ने जानकारी दी है कि यह सभी धरोहर द्वारवती सभ्यता से है, जो कि थाईलैंड में 6वीं शताब्दी से 11वीं शताब्दी तक मौजूद था.
खुदाई के दौरान मिला कीमती सामान
इस मंदिर में भगवान बुद्ध की मूर्ति के नीचे मिले धरोहर के बाद पुरातत्व विभाग ने और ज्यादा खुदाई शुरु कर दी. इस खुदाई में वहां से और भी कई चीजे बरामद हुई. सिर्फ सोने का सामान ही नहीं, यहां से पूजा पाठ की चीजें भी बरामद हुई. खुदाई के दौरान एक गोल्ड प्लेट भी मिली, जिस पर भगवान बुद्ध (Lord Buddha) को बैठे हुए मुद्रा में दिखाया गया है. इसी के साथ सीसा-टिन मिश्रित धातु की प्लेट भी मिली हैं.
थाईलैंड में थेरवाद परंपरा – Sleeping Buddha Thailand
ध्यान देने वाली बात है कि ये सभी चीजें उस समय को दर्शाती हैं जब थाईलैंड में थेरवाद परंपरा ने पैर पसारना शुरु कर दिया था. वहीं, भगवान बुद्ध की प्रतिमा के सिर के नीचे धातु की चादरों का दबा हुआ बंडल भी मिला, जो बताता है कि इस मूर्ति का निर्माण किसी बड़े सांस्कृतिक कार्य के लिए किया गया था. मंदिर में मिले अवशेषों को अब फिमाई राष्ट्रीय संग्रहालय में रखा गया है.
थाईलैंड के ललित कला विभाग (Department of Fine Arts) के साथ सिल्पाकोर्न यूनिवर्सिटी (Silpakorn University) और चियांग माई यूनिवर्सिटी (Chiang Mai University) ने एकजुट होकर इस धरोहरों पर रिसर्च शुरु कर दिया है. विभाग का मानना है कि अवशेषों की मैपिंग से लगता है कि ये 7वीं सदी के हो सकते हैं. हालांकि, अब इन पर गहन शोध किया जा रहा है. इन अवशेषों के जरिये द्वारवती सभ्यता के बारे में और ज्यादा जानकारी हासिल की जा सकेगी.
बौद्ध धर्म और थाईलैंड
आपको बता दें कि फिलहाल इन धरोहरों को संग्रहालय में रख दिया गया है, जहां काफी बड़ी संख्या में लोग इसे देखने के लिए पहुंच रहे हैं. संग्राहलय में बौद्ध धर्म से जुड़े कई अवशेष औऱ धरोहर मौजूद हैं, जिन पर रिसर्च जारी है. जैसे-जैसे वहां अवशेषों के बारे में जानकारी हासिल की जा रही है, बौद्ध धर्म और थाईलैंड में बौद्ध धर्म के विस्तार के शुरुआत को लेकर कई बड़े खुलासे हो रहे है. आज के समय में थाईलैंड में बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या 6 करोड़ 80 लाख से ज्यादा है. यहां बौद्ध भिक्षुओं की संख्या 3 लाख से ज्यादा है और यहां 1 लाख से भी ज्यादा बौद्ध विहार बने हुए हैं.



