Buddhist Research Center: बीएचयू में बौद्ध धर्म का धमाका, ताइवान फाउंडेशन के साथ बनेगा अनोखा शोध केंद्र

BHU, BHU Buddhist Studies Center
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Buddhist Research Center:  भारत महायान बौद्ध धर्म की जन्मभूमि रही है…बौद्ध धर्म यही से निकला और पूरी दुनिया में अपनी पहचान बनाई. लेकिन बौद्ध धर्म भारत से ही विलुप्त हो गया…भारत के इर्द गिर्द के कई देशों ने पूरी तरह से बौद्ध धर्म को अपना लिया लेकिन भारत बौद्ध धर्म में परिवर्तित नहीं हो पाया…अब बौद्ध धर्म की महानता को दुनिया तक ले जाने के लिए ताइवान (Taiwan) ने BHU के साथ एक बड़ा समझौता किया है, जिसके जरिए एक बड़े बौद्ध शोध केंद्र (Buddhist Research Center) की स्थापना होने वाली है. तो चलिए आपको इस लेख में विस्तार से बताते है कि कैसे ताइवान के साथ मिलकर वैश्विक स्तर पर बौद्ध विरासत को बढ़ा रहा है भारत…

बीएचयू में बौद्ध धर्म के अध्ययन

दरअसल, काशी हिंदू विश्वविद्यालय यानी बीएचयू में बौद्ध धर्म के अध्ययन और शोध को नई दिशा देने के लिए ताइवान की प्रतिष्ठित संस्था बौद्ध करुणा राहत त्ज़ू ची फाउंडेशन और बीएचयू प्रशासन के बीच हाल ही में महत्वपूर्ण बैठक हुई. बैठक में विश्वविद्यालय के कला संकाय के पाली और बौद्ध अध्ययन विभाग के तहत एक शोध केंद्र की स्थापना पर गहन चर्चा की गई है. इसी साल 13 अक्टूबर को त्ज़ू ची फाउंडेशन की उपाध्यक्ष लिन पी यू के नेतृत्व में 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बीएचयू का दौरा किया.

बैठक में कौन कौन शामिल 

प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजीत कुमार चतुर्वेदी से मुलाकात कर शोध केंद्र की स्थापना पर विचार-विमर्श किया. कुलपति ने इस पहल का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है. साथ ही उन्होंने कहा कि केंद्र की स्थापना बीएचयू के नियमों के अनुसार शीघ्रता से की जाएगी. बैठक में स्कूल बोर्ड की उपाध्यक्ष प्रो. सुषमा घिल्डियाल, अंतरराष्ट्रीय केंद्र के समन्वयक प्रो. राजेश सिंह और पाली एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के अध्यक्ष अरुण कुमार यादव भी उपस्थित थे.

थेरवाद और महायान दोनों ही बौद्ध परंपराओं

बीएचयू कैंपस में प्रस्तावित यह केंद्र पूरी तरह से शोध पर आधारित होगा. इसका उद्देश्य थेरवाद और महायान दोनों ही बौद्ध परंपराओं को बढ़ावा देना है. इस शोध केंद्र के तहत शास्त्रीय ग्रंथों का गहन अध्ययन, उनका अनुवाद और प्रकाशन किया जाएगा. इसके अलावा, उच्च गुणवत्ता वाले शोध पत्रों पर व्याख्यान श्रृंखलाओं का आयोजन कर विद्वानों और साधकों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ाया जाएगा.

ध्यान देने वाली बात है कि बीएचयू में बनने वाला यह शोध केंद्र विशेष रूप से महायान परंपरा के पुनरुद्धार पर जोर देगा. बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि महायान बौद्ध धर्म जो कभी भारत में फला-फूला और समृद्ध था, वह समय के साथ अपने जन्मस्थान से लगभग लुप्त हो गया. अब बीएचयू (BHU) में इस शोध केंद्र की स्थापना से महायान परंपरा के अध्ययन और जागरूकता को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी.

केंद्र महत्वपूर्ण बौद्ध ग्रंथों और पांडुलिपियों

यह शोध केंद्र महत्वपूर्ण बौद्ध ग्रंथों और पांडुलिपियों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करेगा. इसका उद्देश्य विद्वानों और बौद्ध अनुयायियों के लिए अध्ययन और शोध को सुलभ बनाना है. त्ज़ू ची फाउंडेशन ने थेरवाद और महायान दोनों परंपराओं के ग्रंथों और साहित्य के अनुवाद और प्रकाशन में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई है. इस पहल से न केवल शैक्षणिक शोध को बढ़ावा मिलेगा बल्कि भारत और ताइवान के बीच सांस्कृतिक और बौद्ध विरासत के साझा इतिहास को भी मजबूत किया जा सकेगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस केंद्र की स्थापना बीएचयू में बौद्ध धर्म अध्ययन और अनुसंधान को नई ऊंचाई प्रदान करेगी. यह न केवल शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारत और ताइवान के बीच सांस्कृतिक सहयोग और आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देने वाला कदम है. बीएचयू और त्ज़ू ची फाउंडेशन की यह साझेदारी बौद्ध धर्म पर शोध, ग्रंथों के अनुवाद और प्रकाशन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. इस पहल से भविष्य की पीढ़ियों तक बौद्ध परंपराओं का ज्ञान सुरक्षित और सुलभ रहेगा…बीएचयू के इस कदम की भी काफी तारीफ हो रही है.

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