जब आप बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध के बारे में पढ़ते है तो आपको लगता है उनके जन्म से लेकर परिनिर्वाण तक कई ऐसी घटनाएं हुई जिसके कारण वो बुद्धत्व की तरफ चले गए। उन्होंने संन्यास लिया और कठोर तप करके ज्ञान प्राप्त किया था। उन्होंने अपने ज्ञान को पूरे भारत में फैलाया, उन्होंने लोगों का मार्गदर्शन किया कि व्यक्ति के सभी दुखों का कारण केवल मोह और उसकी इच्छा ही है, जिससे मुक्त होकर ही मोक्ष पाया जाता है, मतलब की बुद्ध बनने के लिए सबसे पहले सांसारिक मोह का त्याग जरूरी है, वहीं एक सवाल और है कि जिस तरह से राम और कृष्ण की आभा बिल्कुल अलग थी, दोनों के जीवन में कोई विलासिता नहीं थी।
बुद्ध राजकुमारी यशोधरा से विवाह
राम ने साधारण गुरुकुल में शिक्षा हासिल की तो वहीं कृष्ण ने बचपन से ही कंस के राक्षसों का सामना किया। लेकिन सिद्धार्थ गौतम के जीवन में तो ऐसा कुछ नहीं हुआ। वो तो एक ऐसे महल में रहते थे जहां हर मौसम के हिसाब से कक्ष बनाए गए थे, भोग विलासिता की सारी वस्तुएं थी। सारे सुख संपदा थे, मात्र 16 साल की उम्र में उस वक्त की सबसे खूबसूरत राजकुमारी यशोधरा से विवाह हुआ था, एक बेटा राहुल भी हुआ था।
फिर भी जब उन्होंने वैराग्य अपनाया तो वो कैसे बुद्ध बन गए, कैसे बुद्धत्व को प्राप्त कर लिया और उनके मार्ग पर चलने वाले करोड़ों बौद्ध भिक्षु आखिर क्यों बुद्धत्व को प्राप्त नहीं कर सकें। आखिर क्यों कोई दुबारा बुद्ध नहीं बना। तो चलिए आपको अपने इस लेख में बतायेंगे कि आखिर क्यों आज तक एक ही बुद्ध हुए, जबकि वो तो एक साधारण से राजकुमार ही थे, कोई दूसरा बुद्ध क्यों नहीं हुआ।
बुद्ध का इतिहास
आज के समय में जितना प्रचलित गौतम बुद्ध है उतना बौद्ध धर्म में कोई नहीं हुआ, जबकि सच तो ये है कि गौतम बुद्ध कोई पहले बुद्ध नहीं थे, बुद्ध मान्यताओं और अशोक के प्राप्त शिलालेखों में से एक कनकमुनि (कोनागमन) बुद्ध के स्तूप का उल्लेख मिलता है जिसने लिखा है कि गौतम बुद्ध सातवें या फिर 25वे बुद्ध है, यानी की उनसे पहले भी कठोर तप के बल पर बुद्ध बने है। लेकिन हैरानी की बात है कि केवल गौतम बुद्ध को ही प्रसिद्धि मिली, और उन्हें ही बौद्ध धर्म का संस्थापक कहा जाता है। बुद्ध” का मतलब होता है जागृत व्यक्ति।
बुद्ध की शिक्षाओं को हिंदू धर्म से प्रेरित
सिद्धार्थ गौतम ने यह सिद्ध किया कि कोई भी व्यक्ति अपने तप और कठोर साधना से खुद को जागृत कर सकता है। और आने वाले भविष्य में मैत्रीय बुद्ध होंगे, जो बुद्ध का ही स्वरूप होंगे। लेकिन सवाल ये है कि ऐसे कई महान बौद्ध भिक्षु हुए लेकिन फिर भी वो बुद्ध क्यों नहीं हुए। पहले के बुद्ध की शिक्षाओं को हिंदू धर्म से प्रेरित माना गया, जिससे वो हिंदू धर्म के प्रभाव में विलुप्त होती चली गई।
वहीं गौतम बुद्ध के समय में लिखित अभिलेख मिले, बल्कि गौतम बुद्ध के समय में लोग सामाजिक बदलाव के महत्व को समझने लगे थे और उन्हें खुद के साथ होने वाले उत्पीड़न का भी आभास होने लगा था। वहीं अशोक और बिम्बिसार जैसे महान शासकों ने भी बौद्ध धर्म को महत्ता और सुरक्षा दी थी, जिसके कारण ये इतना प्रचलित हो गया। गौतम बुद्ध का एक बड़ा और महान अनुयायी दल था। जिसके कारण गौतम बुद्ध सबसे ज्यादा पूजे हुए, और उनका नाम का प्रचलन हुआ।
क्यों नहीं हुए पहले के बुद्ध प्रचलित
अब सोचने वाली बात है कि जब गौतम बुद्ध से पहले भी बुद्ध हुए तो वो इतना प्रचलित क्यों नहीं हुए। इसका पीछे कई तथ्य हो सकते हैं। सबसे पहले गौतम बुद्ध से पहले ज्ञान को मौखिक रूप से आदान प्रदान किया जाता होगा, सनातनी संस्कृति के दवाब के कारण उनके पास न तो बेहतर साधन होंगे और न ही गौतम बुद्ध की तरह महान संरक्षण और अनुयायी, जिसके कारण उनके विचारों को ज्यादा मान्यता ही नहीं दी गई। वहीं गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म की सही में मायने में स्थापना नहीं की बल्कि उसका पुनरुत्थान किया था।
गौतम बुद्ध के बाद की क्यों नहीं कर पाया खुद को जागृत
अब सवाल ये है कि गौतम बुद्ध के बाद कोई बुद्ध क्यों नहीं बना, तो उसके पीछे असल में कई कारण हो सकते है। गौतम बुद्ध के प्रभाव को कम करने के लिए ब्राह्मणों ने कई चाल चली थी। उन्होंने बुद्ध के रास्ते को बेहतर बताने की कोशिश करते हुए बुद्ध को सुप्रीम बना दिया था, जबकि वो खुद को एक सामान्य इंसान मानते थे, जिन्होंने ये कहा था कि कोई भी व्यक्ति अपने तप के बल पर बुद्ध बन सकता है। लेकिन जानकारों को माने तो बुद्ध को प्रभावशाली दिखा कर उनसे ऐसा दिखाया गया कि इकलौते वहीं है तो बुद्ध बनना डिजर्व करते है।
भारत से बौद्ध धर्म का पतन
जिससे कोई और उनके स्थान पर खड़ा होने की कोशिश न करें। वहीं एक मत ये भी है कि गौतम बुद्ध असल में आज के समय के बुद्ध है, इससे पहले जो भी बुद्ध है उनका अनुसरण किया भी गया होगा तो सनातन के प्रभाव के कारण उनका पतन हो गया होगा, जैसा कि 12वी सदी के बाद भारत से बौद्ध धर्म का पतन होने लगा था। बुद्ध को आज भी सुप्रीम बताया गया है, मोक्ष प्राप्ति के कई मार्ग बताए गए है लेकिन कोई भी बुद्ध नहीं बन पाया। कुल मिलाकर हम ये कह सकते है कि गौतम बुद्ध के पीछे अनुयायियों की संख्या ने उन्हें इतना प्रचलित किया।
जिसमें अशोक जैसे महान सम्राट भी शामिल है। जिनके कारण आज बौद्ध धर्म एशिया के अलग अलग हिस्से में पहुंच गया। आज के समय में भी ऐसे बहुत से तपस्वी है जिन्हें असल में सांसारिक मोह से मुक्ति मिल गई है लेकिन वो बुद्ध नहीं बने, क्योंकि उन्हें पीछे एक विशाल अनुयायी समूह नहीं है।



