Buddhism in afganistan: जब हम एक आजाद और आधारित से परिपूर्ण एक देश को कट्टरवादिता और रूढ़िवादी सोच के अधीन होते हुए सुनते हैं तो सबसे पहले आपके जहां में अफगानिस्तान का नाम आता है आज अफगानिस्तान कट्टर वाली इस्लामी संगठन और देश तालिबान के अधीन है । लेकिन लगातार युद्ध और संघर्ष का नतीजा ये हुआ कि अफगानिस्तान जो कि एक धर्म निरपेक्ष लोकतांत्रिक देश था, वो इस्लामिक कट्टपंथी का गुलाम हो गया।
हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ जब अफगानिस्तान को अपना मूल धर्म छोड़कर इस्लाम की तरफ बढ़ाना पड़ा हो इससे पहले भी सातवीं शताब्दी में अफगानिस्तान को इस्लाम के फलने फूलने का घर बना दिया गया नतीजा एक बहुत बड़ा बौद्ध देश पूरी तरह से अफगानिस्तान कैसे बन गया।
बौद्ध धर्म पर हावी हुआ इस्लाम
610 ईस्वी में इस्लाम धर्म के संस्थापक मोहम्मद साहब ने जब सातवीं शताब्दी में इस्लाम की नींव रखी थी तो वो केवल सऊदी अरब के मक्का मदीना तक सीमित था, लेकिन धीरे धीरे उसका विस्तार शुरू हुआ, और उस दौरान अरब के साथ साथ इस्लाम का विस्तार अफगानिस्तान में भी होने लगा। इतिहासकारों की माने तो इस्लामिक व्यापारियों के जरिए और फिर आक्रमणकारियों के जरिए सातवीं सदी में इस्लाम अफगानिस्तान आ गया था। उस दौरान अफगानिस्तान में बौद्ध धर्म का बोलबाला था।
सातवीं सदी तक अफ़ग़ानिस्तान का मुख्य धर्म
अफगानिस्तान का पुराना नाम कांधार हुआ करता था, जो कभी भारतीय उपमहाद्वीप का हिस्सा ही था। तीसरी शताब्दी में जब महान सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का विस्तार पूरे एशिया में शुरू किया तब इसके विस्तार में कांधार भी शामिल है। इतिहासकारों के अनुसार गांधार और बैक्ट्रिया जैसे प्राचीन राज्यों में बौद्ध धर्म काफी फला-फूला और वहां बौद्ध धर्म को बहुत महत्ता दी जाती थी। रिपोर्ट के माने तो यहां पर प्रमुख बौद्ध विहार और मठ हुआ करते थे और इन स्थानों पर हजारों की संख्या में बौद्ध अनुयायी रहा करते थे। चीन और उसके आसपास के देशों से लोग बौद्ध धर्म को जानने के लिए कांधार आया करते थे।
कांधार में बौद्ध धर्म का स्वर्ण युग
उस दौरान बामियान और मेस अयनाक जैसे बौद्ध केंद्र काफी प्रचलित और प्रमुख बौद्ध केंद्र हुआ करते थे। इस समाज को कांधार में बौद्ध धर्म के स्वर्ण युग कहा जाता है। लेकिन सातवीं शताब्दी में जब इस्लाम पहली बार दुनिया सामने अस्तित्व में आया तो उन लोगों ने जानबूझ कर बौद्ध देशों को पहले निशाना बनाया। जिसे मालदीप और कांधार जैसे देश शामिल है।
बौद्ध धर्म के अवशेषों को खत्म करने की कोशिश
इस्लामिक व्यापारी यहां आकर इस्लाम का प्रचार प्रसार करते थे, जिससे लोगों के बौद्ध धर्म को लेकर सवाल खड़े होने लगे, रही सही कसर को इस्लामिक आक्रमणकारियों ने पूरा कर दिया। वो एक साथ आते और लोगों को निर्मम हत्याएं करते थे। लूटपाट करते थे और उनके पुराने अवशेषों को खत्म करने को कोशिश करते थे। लेकिन फिर भी आज भी वहां बौद्ध धर्म के होने के कई अवशेष मिले है। और अब भी मिलते ही है। जो वहां बौद्ध धर्म के होनो का प्रमाण है।
सातवीं सदी के बाद कांधार बदलने लगा और समय के साथ वो इस्लामिक देश बनता गया। मौजूदा समय में वो अफगानिस्तान है और वहां बौद्ध धर्म को मानने वाले न के बराबर है। खासकर तालिबानी हुकूमत के बाद तो शरीया कानून लागू हो गया। महिलाओं की आजादी छीन ली गई।आज युद्ध और अशांति की मार झेल रहा है, जिस बौद्ध धर्म ने शांति और अहिंसा का पाठ पढ़ाया वहीं अब अफगानिस्तान से लुप्त हो गया है।



