Laos Buddhism country: इन दिनों धीरेंद्र शास्त्री अपनी सनातन एकता यात्रा पर हैं और हिंदुओं को एकजुट करने की बात कर रहे हैं. यह सच्चाई है कि भारत में आज के समय में हिंदुओं की आबादी 80% के करीब है लेकिन जब आप कई पीढ़ी पीछे जाएंगे तो आपको पता चलेगा कि हर किसी का कनेक्शन बौद्ध धर्म से जुड़ा हुआ है. जी हां, एक दौर था कि भारत पर बौद्ध राजा का अधिकार था और अफगानिस्तान से लेकर दक्षिण तक पूरा भारत बौद्धमय था.
लेकिन आज इसी भारत में बौद्ध एकता यात्रा के बजाए, सनातन एकता यात्रा निकाली जा रही है. भारत को बौद्ध देश बनाने के बजाए, हिंदू देश बनाने पर बात चल रही है. लेकिन क्या आप जानते है एक दौर में कैसे पूरी तरह से हिंदू बहुल देश रहा लाओस, अब एक बौद्ध कंट्री बन चुका है. अगर नहीं तो चलिए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.
हिंदू राष्ट्र लाओस कैसे बना थेरवाद बौद्धों की भूमि
दरअसल, दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित लाओस की आबादी 77 लाख से ज्यादा है. लाओस की 66% से ज्यादा आबादी आज बौद्धों की है. यह छोटा सा देश चारों ओर से वियतनाम, कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार और चीन से घिरा हुआ है. 2,36,800 वर्ग किलो मीटर में फैले इस देश में हिंदुओं की आबादी मात्र 7 हजार है. लाओस के अगल बगल के जितने भी देश हैं, उनमें बौद्धों की आबादी अच्छी खासी है. लेकिन ऐसा हमेशा से नहीं था. लाओस अपने पड़ोसी देशों वियतनाम, कंबोडिया, थाईलैंड, म्यांमार की तरह हिंदू देश हुआ करता था लेकिन 12वीं सदी में सबकुछ बदल गया.
लाओस में धर्म परिवर्तन की कहानी
उस दौर में लाओस में भी खमेर वंश का शासन था. खमेर वंश हिंदू धर्म को मानता था और 12वीं सदी तक लाओस, हिंदू देश ही था. 12वीं सदी में लाओस के खामेर वंश की राजकुमारी की शादी कंबोडिया के एक राजघराने में हुई. यह वही दौर था जब कंबोडिया में बौद्ध धर्म अपनी पकड़ मजबूत करने में लगा था. बौद्ध धर्म की महानता को देखते हुए कंबोडिया राजघराने ने भी हिंदू धर्म को छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया.
ऐसे में राजकुमारी का मायका होने के कारण कंबोडियो से बौद्ध भिक्षुओं को लाओस आमंत्रित किया जाने लगा. यहीं से बौद्ध धर्म का प्रभाव लाओस में बढ़ने लगा…बौद्ध धर्म में लोगों की दिलचस्पी बढ़ने लगी और यह प्रभाव इतना पॉजिटिव था कि लाओस के खमेर वंश के राजा ने भी बौद्ध धर्म अपना लिया. अपने राजा को बौद्ध धर्म की ओर जाता देख, वहां की जनता भी बौद्ध धर्म की ओर खींची चली गई और बौद्ध धर्म अपनाना शुरु कर दिया. और इस तरह से लाओस बौद्ध धर्म में परिवर्तित हो गया.
शिव भक्ति से बुद्ध की शरण तक
ध्यान देने वाली बात है कि कंबोडिया की तरह लाओस में भी हिंदू राजाओं ने कई भव्य शिव और विष्णु मंदिर बनवाए थे…लेकिन जब वहां के राजाओं ने बौद्ध धर्म अपनाया तो सबकुछ बदल गया. धर्म बदलने के साथ साथ सारी मान्यताएं भी बदल गईं. कई मंदरों को बौद्ध विहारों में बदला गया…साथ ही जो मंदिर नहीं बदले गए उन्हें खंडहर होने के लिए छोड़ दिया गया. 14वीं सदी के बाद से लाओस में बौद्ध धर्म काफी तेजी से मजबूत होता चला गया, जो आज भी बरकरार है.
लाओस के तमाम ऐतिहासिक स्थलों पर आज भी हिंदू धर्म के निशान दिख जाते हैं…लेकिन लाओस ने शांति चुनी, समर्पण चुना और खुद को भगवान बुद्ध के चरणों में समर्पित कर दिया. आज यहां रहने वाले लोग बौद्ध धर्म में काफी खुशहाल हैं और बौद्ध मान्यताओं में रमे-बसे हैं. हिंदू धर्म से बौद्ध धर्म में परिवर्तित होने वाले लाओस की कहानी, आज भी हर किसी को प्रेरणा देती है.



