कौन है बौद्ध धर्म में मैत्रेय बुद्ध? कब होगा मैत्रेय बुद्ध का धरती पर आगमन? धर्म की स्थापना से कैसे जुड़ा है मैत्रेय बुद्ध का रिश्ता

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आपने हिंदू धर्म में सृष्टि के पालनकर्ता श्री हरि विष्णु के दस अवतारों का कहानी कई बार सुनी होगी… जिसमें कहा जाता है की चारों युगों में विष्णु जी कुल दस अवतारों में आयेंगे, जिसमें से वो नौ अवतार ले चुके है और दसवा अवताल, जो कि कल्कि अवतार होने वाला है, वो सृष्टि के अंत में लेंगे, जो कि कलि नाम से असुर से लड़ेंगे, और सृष्टि में फिर से धर्म की स्थापना करेंगे..कल्कि के आने को लेकर बॉलीवुड में फिल्म भी बनी है.. कल्कि 2898 एडी..जो कि काफी हिट भी ही थी..  ये कहानी हिंदू धर्म में काफी प्रचलित है।

बौद्ध धर्म ग्रंथों में भी एक ऐसे बुद्ध का वर्णन

लेकिन क्या आप ये जानते है कि बौद्ध धर्म ग्रंथों में भी एक ऐसे बुद्ध का वर्णन है, जो कलियुग में फिर से धर्म को स्थापित करने के लिए धरती पर आयेंगे.. अब सवाल ये उठता है कि इस बात में कितनी सच्चाई है.. जिस तरह के विष्णु बैकुंठ लोक में रहते है वैसे ही बुद्ध कहां है.. और कैसे और क्यों वो फिर से धरती पर आयेंगे। अपने इस वीडियो में हम बुदेध के उस रूप की बात करेंगे, जिसे मैत्रेय बुद्ध कहा जाता है, जो कि असल में अभी तक संसार में आये ही नहीं है। आईये जानते है कि कौन है मैत्रैय बुद्ध…

कौन है मैत्रेय बुद्ध?

मैत्रेय बुद्ध बौद्ध परम्पराओं के अनुसार वर्तमान बुद्ध, शाक्यमुनि गौतम बुद्द के उत्तराधिकारी होंगे, जो कि संसार में धर्म को फिर से स्थापित करने से लिए धरती पर आयेंगे। मौजूदा समय में वो तुषित (पालि में तुसित) नाम के स्वर्ग में निवास करते हैं, और मैत्रेय अपने समय में केतुमती नामक भूमि के स्वामी होंगे, जो कि वर्त्तमान बनारस से जोड़ कर देखी जाती है।

महायान शाखा के अनुसार धरती पर आने वाले हर बुद्ध पहले तुषित स्वर्ग में रहा करते है, और धरती पर आने के बाद वो किसी भूमि के स्वामी होते है, जैसे कि अमिताभ बुद्ध को सुखवती नामक भूमि का स्वामी रहे, वैसे ही मैत्रेय बुद्ध केतुमती नामक भूमि के स्वामी होंगे।

मैत्रेय बुद्ध की पहचान

मैत्रेय शब्द संस्कृत के “मित्र” अथवा “मित्रता” से लिया गया है, जिसे पाली भाषा में “मेत्तेय” कहा जाता है। मैत्रेय बुद्ध की अवधारणा असल में तीसरी से छठी शताब्दी के आसपास निकली जब अमिताभ बुद्ध की अवधारना फैलनी शुरु हुई थी। मैत्रेय बुदध शाक्य बुद्द से अलग है, उनके सर पर स्तूपाकार मुकुट है, बायें हाथ में कुंभ (जलपात्र) हैस जिसे तिब्बती परंपरा में ज्ञानपात्र  माना जाता है, खासकर कंधारी मूर्तिकला में उन्हें गहनो से सुसज्जित दिखाया गया है।

लेकिन ये खड़ी हुई अवस्था में है, वहीं बैठी हुई अवस्था में उन्हें सिंहासन पर बिठाया हुआ दिखाया जाता है, जिसमें दोनों पाँव धरती पर रखे हुए या फिर एक पाँव घुटने से मुड़ा हुआ दूसरे पाँव पर रखे हुए, जो कि तुषित स्वर्ग में अपने धरती पर आने का इंतजार करते हुए प्रतीत होते है। उनता स्तूपाकार मुकुट, शाक्य बुद्ध के उत्तराधिकारी होने का सबूत है, और इस प्रमाण के आधार पर ही श्वेत कमल पर रखे धर्मचक्र के वो उत्तराधिकारी होंगे।

अलग अलग धर्मों में अलग अलग अवधारणाये

मैत्रेय बुद्ध को लेकर अलग अलग धर्मों में अलग अलग अवधारणाये है, एक तरफ थियोसोफिकल परंपरा के लोग मानते है कि 20वी सदी में जिद्दु कृष्णमूर्ति” नामक एक बालक को मैत्रेय बुद्द के रूप में स्वीकार किया गया था, अहमदिया धर्म के लोगों का मानना रहा है कि उन्नीसवी सदी के मिर्जा गुलाम अहमद मैत्रेय बुद्ध हो सकते है तो वहीं बहाई लोगो का मानना है कि बहाउल्लाह ने  विश्व शांति का संदेश दिया है और मैत्रेय बुद्ध की सहिष्णुता और प्रेम को फैलाने वाली अवधारना पर खरे उतरते है, इसलिए वो ही मैत्रेय बुद्ध हो सकते है।

कलियुग का तो अभी 5000साल ही गुजरा

हालांकि मैत्रेय बुद्ध के संसार में आगमन को लेकर अभी समय तय नहीं है, लेकिन ये कहा गया है कि जब संसार में धर्म नहीं होगा तब मैत्रेय बुद्ध धरती पर आयेंगे, जो कि मौजूदा समय में आने की बात को सिरे से खारिज करते है। मैत्रेय बुद्ध की कहानी हिंदू धर्म में विष्णु जी के कल्कि अवतार से काफी मिलती जुलती है। और पुराणों और धर्म ग्रंथो के अनुसार कलियुग का तो अभी 5000साल ही गुजरा है, और कलियुग कुल 4लाख 32 हजार साल का है, जिसमें अभी कलियुग का गोल्डन पीरियज चल रहा है, ऐसे में कल्कि अवतार में अभी काफी समय है, और उसी मत के अनुसार चले तो मैत्रेय बुद्ध के भी धरती पर आने में लंबा समय है।

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