Khilji Nalanda attack: नालंदा की वो किताबें जो खिलजी अपने साथ ले गया! क्या हमारा विज्ञान आज भी उनके पास है?

Khilji and Nalanda
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Khilji Nalanda attack: ये समय था पांचवी शताब्दी का… महान महाजनपद मगध पर राज करने वाले राजा थे गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम … जिनका जन्म 415 इसवी के आसपास हुआ था। ये वो समय था जब भारत मे बौद्ध धर्म काफी फल फूल रहा था, और मगध से तो बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध को वैसे ही काफी लगाव था। उन्हें ज्ञान की प्राप्ति वहीं हुई थी, उसके वैशाली शहर में वो अक्सर आते थे। एक तरफ महान सम्राट अशोक ने पाटलीपुत्र को अपनी राजधानी बनाई थी, तो वहीं गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने भी पाटलीपुत्र को अपना राजधानी घोषित की थी, और बौद्ध धर्म को बढ़ावा देने, और भारतीय शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने भारत की पहली विश्वविद्यालय को शुरु करने का फैसला किया, जिसे आज दुनिया नालंदा विश्वविद्यालय के नाम से जानती है।

नालंदा में  9 मंजिला पुस्तकालय

वर्तमान में जो संरचना आप देखते है वो असल में पूरी तरह से जली हुई, तबाह हो चुकी संरचना है जिसका कारण केवल एक क्रूर शासक बख्तियार खिलजी था। जिसे नालंदा का ज्ञान इतना चुभा कि उसने इस ज्ञान के सागर में आग लगवा दी..10 हजार छात्र औऱ 2000 शिक्षकों से सुशोभित नालंदा में  9 मंजिला पुस्तकालय था। इस पुस्तकालय का नाम धर्म गूंज था जिसे तीन हिस्सों में बाँटा गया था- रत्नरंजक, रत्नोदधि, रत्नासागर.. ये लाइब्रेरी महान ग्रंथो से भरा हुआ था.. लेकिन खिलजी के खोखले अहम को शांत करने के लिए उसने न केवल नालंदा में रक्तपात मचाया बल्कि लाइब्रेरी को आग के हवाले कर दिया था।

क्रूर सैन्य कमांडर था बख्तियार खिलजी

धू धू कर करीब 3 महीनो तक वो 90 लाख किताबें जलती रही.. जो शायद आज होती तो भारत कब का महाशक्ति देश बन चुका होता..मगर बहुत कम लोग ये जानते है कि खिलजी अपने साथ कुछ किताबें चुरा कर ले गया था.. और कहा जाता है कि भारत का अहम विज्ञान आज भी उनके पास है। साल 1193 की बात है, तुर्की का क्रूर सैन्य कमांडर था बख्तियार खिलजी..जिसने नालंदा के शिक्षकों के अहसान के बदले उन्हें गाजर मूली की तरह काटा.. लेकिन जब वो नालंदा पहुंचा तो वो वहां की किताबो और वहां के ज्ञान के देखकर भौचक्का रह गया।

वो समझ गया था कि आखिर क्यों भारत इतनी बड़ी ताकत बन गया है, और अगर इन किताबों को नष्ट न किया गया तो वो भारत को उस स्थिति में ले जायेगा, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकते है। बस फिर क्या था, उसने किताबों में न केवल आग लगवाई बल्कि को कुछ किताबों को अपने साथ भी ले गया… कहा जाता है कि उन किताबों में हमारे विज्ञान का वो रहस्य मौजूद थे, जिसे जानने के लिए आज भी शोध किये जा रहे है।

खिलजी को नालंदा की महानता के बारे में पता चला

कहते है कि खिलजी जब भारत आया तब उसे पहली बार भारत में बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म की महानता का पता चला। हालांकि वो हिंदुस्तान में केवल लूटपाट करने के इरादे से ही आया था, और उसने वहीं किया.. लेकिन भारत में रह कर जब उसने नालंदा की महानता के बारे में जाना तो उसे ये समझते देर न लगी कि नालंदा जैसे विश्वविद्यालय रहे तो इस्लाम कभी भारत में फल फूल ही नहीं पायेगा। भारत में इस्लाम को खतरा था।

वहीं भारतीय और गैर इस्लामिक धर्म को मानने वालों को वो काफिर कहता था, जिनका छुआ हुआ पानी भी नहीं पी सकता था, ऐसे में नालंदा के ही एक शिक्षक की समझदारी, ज्ञान और सूझबूझ के कारण वो स्वस्थ्य हुआ था, इसलिए वो नालंदा को करीब से देखने गया था, लेकिन खतरनाक इरादों के साथ.. उसने उसके ही स्वागत के लिए बौद्ध भिक्षुओं को दो टुकड़ो में काट दिया.. और जानबूझ कर रक्तपात मचाया।

खिलजी ने पूरी लाइब्रेरी को आग लगाई

वो उन किताबों को भी छूना नहीं चाहता था जो भारत की महानता और उसके ज्ञान को दर्शाते और उनका बखान करते है, जिसके कारण ही उसने पूरी लाइब्रेरी को आग के हवाले करवा दिया… सिवाये आग के धुयें और चारों तरफ भिक्षुओं के खून के अलावा कुछ नहीं बचा था। ऐसे में जो भारतीयों का छुआ पानी पीने के लिए राजी नहीं थी, वो वहां से किताब लेकर जायें, इसके प्रमाण कम मिलते है, लेकिन कभी कभी ये चर्चा होती है कि खिलजी ने नालंदा के किताबें भी चुराई थी.. मगर तुर्की में इसके कोई प्रमाण अभी भी मौजूद नहीं है। इसलिए भारत की तरफ से कोई दावा नहीं किया गया.. लेकिन ये प्रमानित है कि उसने तबाही मचाई थी।

श्रीकृष्ण के मुंह में नवग्रहों का दिखना

नालंदा को लेकर आज भी काफी चर्चा होती है, ये इमेजिन किया जाता है कि वो ज्ञान का भंडार होता तो शायद भारत की स्थिति कुछ और ही होती। वैसे आपको क्या लगता है, क्या आपको नहीं लगता है कि जो ग्रंत अब भी सुरक्षित है, उनके अनुसार कुछ ऐसी बातें हमारे धर्म ग्रंथो में बताई गई थी, जो अब वास्तविक साबित हो रही है। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण हिंदू देवता श्रीकृष्ण के मुंह में नवग्रहों का दिखना था, जिसे पहले वैज्ञानिको ने इंकार कर दिया था, लेकिन अब तो प्रमाणित हो चुका है। बहुत से ऐसे प्रमाण है जिसे हमारे ग्रंथो में पहले ही बताया गया है, जो अब सही साबित हो रहे है।

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