दो बौद्ध देश शिव मंदिर के लिए क्यों बहा रहे खून, जानिए थाईलैंड और कंबोडिया के संघर्ष की कहानी 

Thailand and Cambodia Buddhism
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Thailand & Combodia: 8 दिसंबर को दक्षिण एशिया में बसे दो बौद्ध देशों कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सीमा विवाद को लेकर हवाई हमले की खबरें सामने आई.. अक्सर आपने सीमा विस्तार, अपनी ताकतो को दिखाने के लिए, या फिर सैन्य कारणों से दो देशों के बीच विवाद होते देखा या सुना ही होगा.. लेकिन कंबोडिया और थाईलैंड के बीच का ये विवाद किसी सैन्य ताकत को लेकर नही बल्कि एक मंदिर को लेकर है, और सबसे हैराना करने वाली बात तो ये है कि कंबोडिया और थाईलैंड जहां की 90 प्रतिशत आबादी थेरवाद बौद्ध धर्म को मानती है, वो दोनो देश एक मंदिर के लिए विवाद कर रहे है

जो कि भगवान बुद्ध का नहीं है बल्कि हिंदुओं के देवो के देव महादेव का है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर क्यों एक हिंदू मंदिर के लिए दो बौद्ध देश आपस में भिड़ गए है, ये विवाद इतना हिंसक क्यों हो गया है। अपने चलिए इस लेख में जानते हैं कि करीब 400 सालों से चल रहे इस सीमा विवाद के बारे जिसके कारण कभी घनिष्ट दोस्त रहे थाईलैंड और कंबोडिया के बीच विवाद हो गया और दोनो देश दुश्मन बन बैठे है।

क्या है शिव मंदिर का इतिहास

दरअसल कंबोडिया और थाईलैंड पड़ोसी देश है औऱ दोनो के बीच करीब 817 किलोमीटर की सीमा है जो कि पूर्व में लाओस से शुरु होकर थाईलैंड की खाड़ी तक जाती है। वैसे तो पूरी सीमा बंटी हुई है लेकिन भगवान शिव का एक प्राचिन मंदिर जिसे वहां के लोग  प्रीह विहियर के नाम से बुलाते है, इस मंदिर को लेकर दोनो देशों के बीच करीब 800 किलोमीटर तक विवाद गहराया हुआ है।

प्रीह विहियर मंदिर का निर्माण 1100 साल पहले दोनो देशों में मूल निवासी सियामी और खमेर जनजाति के लोग जो इस सीमा पर रहा करते थे, दोनों जनजाति ने कराया था, ये वो समय था जब दोनो देशों में बौद्ध धर्म नहीं बल्कि हिंदू धर्म का बोलबाला था, और कंबोडिया और थाईलैंड के बीच सौहार्दपूर्ण रिश्ता हुआ करता था। इस मंदिर में दोनो जनजातियों ने मिलकर शिवलिंग को स्थापित किया था, जिसे थाई भाषा में फ्रा विहान भी कहा जाता है।

कैसे शुरु हुआ विवाद

दरअसल 15 शताब्दी तक दोनो देशों के बीच सब ठीक था, दोनो देशों में बौद्ध धर्म पूरी तरह से फलने फूलने लगा था, लेकिन फिर भी बौद्ध राजाओं और प्रजा ने प्रीह विहियर मंदिर को कोई नुकसान नहीं पहुचांया, लेकिन 15 सदी के बाद सब बदलने लगा। थाईलैंड में अयुत्थ्या साम्राज्य काफी मजबूत साम्राज्य बन गया था तो वही कंबोडिया में खमेर राजा की स्थिति कमजोर हो रही है, और 16 वी सदी के अंत में अयुत्थ्या के राजा नरेसुसान ने खमेर की राजधानी अंगकोर पर हंमला कर दिया और खमेर के राजा का सिर कलम कर दिया।

बिना राजा के वियतनाम और थाईलैंड जैसे मजबूत देशों के लिए कंबोडिया एक कमजोर देश बन कर रह गया, तब से 19 सदी में जब ब्रिटिशों ने शासन करना शुरू किया, तब तक कंबोडिया थाईलैंड के रहमो करम पर ही था। यूरोपीय उपनिवेशवाद ने 19वी सदी में फ्रेंच इंडोचाइना का हिस्सा घोषित करके कंबोडिया का एक नक्शा बनाया, 1904 में जब यूरोपियन ने कंबोडिया का नक्शा पास किया तो उसमें प्रीह विहियर मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा बता दिया गया था, लेकिन इस नक्शे को थाईलैंड ने मानने से इंकार कर दिया और मंदिर का क्षेत्र अपने आधिकार क्षेत्र का बताया, और तभी से कंबोडिया और थाईलैंड के बीच मंदिर को लेकर सीमा विवाद जारी है।

1962 में पहली बार वैश्विक तौर पर आया सामने-

दरअसल सीमा विवाद को लेकर प्रीह विहियर मंदिर के हिस्से वाले सीमा को अपना बताते हुए 1962 में पहली बार कंबोडिया अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय यानि की International Court of Justice में ये मामला ले कर गया। यूरोपियन साक्ष्यों के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) ने मंदिर वाले हिस्से को कंबोडिया का आधिकारिक क्षेत्र बता दिया, लेकिन थाईलैंड ने इस फैसले को मानने से इंकार करते हुए तर्क दिया कि मंदिर के पास की लगभग 4.6 किलोमीटर की जमीन अभी भी अनाधिकृत है, जो किसके हिस्से में है इसका फैसला नहीं हुआ है, तो फिर मंदिर कंबोडिया के हिस्से में कैसे जा सकता है। और ये विवाद आगे भी जारी रहा।

दरअसल 2008 में कंबोडिया के आग्रह पर  अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय  ने युनेस्को को निर्देश दिये कि   प्रीह विहियर मंदिर  को विश्व धरोहर में शामिल कर लिया जाये और इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल कर  दिया गया, जिससे कहीं न कहीं इसे कंबोडिया का हिस्सा बताने की कोशिश की गई, लेकिन इससे थाईलैंड काफी नाराज हो गया।

2025 में कई बार हुए सैन्य हमले-

8 दिसंबर को जो हमला थाईलैंड ने किया, वो असल में कंबोडिया के खिलाफ जवाबी कार्यवाई थी। खबरों की माने तो  थाईलैंड के सैन्य अधिकारी मेजर जनरल विन्थाई सुवारी ने कहा कि कंबोडिया की तरफ से लगातार उनपर हमला किया जा रहा है। इस हमले में उनका एक जवान शहीद हो गया है, जिस कारण ही थाईलैंड ने जवाबी कार्यवाई की। इससे पहले भी जुलाई में दोनो देशो के बीच मंदिर को लेकर 5 दिनो तक विवाद बना हुआ और युद्ध जैसी स्थिति हो गई थी।

जिसके कारण बॉर्डर पर रहने वाले लोगो को वहां से विस्थापित करवा दिया गया था। हालांकि अक्टूबर से सीजफायर था, लेकिन फिर से ये हमले तेज हो गये है। हालांकि अब वैश्विक तौर पर सबकी नजरे कंबोडिया और थाईलैंड के बीच एक मंदिर को लेकर होने वाले विवाद पर टिक गई है। ऐसे में देखना ये होगा कि इस विवाद का कोई फैसला निकलता है या नहीं..और आखिर कब तक निकलेगा।

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