Haryana IPS suicide case: हरियाणा में एक दलित IPS अधिकारी पूरन कुमार ने अपने चंडीगढ़ के घर में खुद को गोली मार कर आत्महत्या कर ली है। हरियाणा कैडर के ADGP स्तर के IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या का सही कारण सामने नहीं आया है। लेकिन पुलिस इसे जातिगत भेदभाव और किसी गैंगस्टर की लगातार प्रताड़ना से जोड़ कर देख रही है। वही इस मामले को लेकर एक स्पेशल पुलिस फाॅर्स (Special Police Force) जाँच बैठाई है। जिसके बाद ही किसी एक निर्णय पर पहुचा जा सकेगा। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताते हैं।
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आईपीएस ऑफिसर ने गोली मार कर की खुदकुशी
जब दलितों के साथ सामाजिक न्याय की बात आती है तो मनुवादी खुद को ही कानून और खुद को ही न्यायालय समझ लेते है। ऐसा लगता है जैसे ये देश दलितों का है ही नहीं। वैसे तो कहने के लिए भारत आजाद देश है लेकिन दलितों की स्थिति आज भी एक गुलाम की तरह ही है। ऐसा ही एक मामला चंडीगढ़ से सामने आया जहाँ हरियाणा के दलित आईपीएस (IPS) ऑफिसर वाई पूरन कुमार के अपने ही घर में गोली मार कर खुदकुशी कर ली। जिसके बाद उनकी मौत पर राजनीतिक दल भी आगे आ गए हैं और हरियाणा सरकार पर निशाना साध रहे हैं।
आप ने हरियाणा सरकार पर जमकर निशाना साधा
दरअसल, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने हरियाणा सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए बीजेपी को दलित विरोधी मानसिकता वाला बताया है। अनुराग ढांडा ने कहा बीते 10 सालों में राज्य में बीजेपी की सरकार है, लेकिन दलितों के साथ अत्याचार के मामलों में कमी आने के बजाय और ज्यादा बढौतरी हुई है। सच तो ये है कि बीजेपी कभी भी दलितों को आगे बढ़ते हुए, ऊंचे पदों पर बैठते हुए देख ही नहीं सकती है।
इतना ही नहीं उन्होंने दलित आईपीएस officer की मौत पर निष्पक्ष जांच की मांग की है और साथ ही मृतक के परिवार को न्याय देने की बात भी कही हैं। अगर पूरण कुमार जैसे कुछ दलित अफसर ऊंचे पद पर बैठ भी जाए तो उन्हें इस कदर प्रताड़ित किया जाता है कि वो या तो नौकरी ही छोड़ देते हैं या फिर अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर लेते है।
उन्होंने हरियाणा के सीएम को घेरते हुए कहा कि वो विदेशों के दौरे पर है। उन्होंने भी केवल दलित अफसर होने के कारण इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। वहीं उनकी पत्नी जो कि खुद एक ऊंचे पद पर है उन्हें भी अब प्रताड़ित करना शुरू कर दिया गया है। आखिर ऐसा क्या छिपाना चाहती है सरकार, या फिर इसमें सबकी मिली भगत है।



