Agra news: हाल ही में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) से खबर सामने आई है, जहां एक दलित परिवार को अपनी बेटी की हत्या के मामले में 16 साल बाद न्याय मिला है। आगरा की स्पेशल एससी एसटी कोर्ट (SC-ST COURT) में 35 साल के आरोपी कुमार सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताते हैं।
और पढ़े: जातिगत उत्पीड़न का शिकार मासूम! गौशाला में कैद दलित बच्चे की मौत, न्याय पर गहरा सवाल
16 साल बाद मिला पीड़िता परिवार को न्याय
ऐसा लगता है कि जैसे अब दलित बन कर पैदा होना भी अभिशाप होता जा रहा है। दलितों के लिए तमाम कानून, न्याय की बातें किताबी होती जा रही है। कोई मासूम हो या बुजुर्ग, अगर वो दलित है तो ऊंची जाति वालो को शायद खुद ही अधिकार मिल जाते है उन्हें प्रताड़ित करने का, फिर क्यों है संविधान, और क्यों है कानून। हर दिन अखबारों में दलितों से जुड़े मामले सामने आते है।
ऐसी ही एक खबर यूपी के ही आगरा से है, जहां 16 साल बाद एक दलित बच्ची के की हत्या करने के मामले में पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। आगरा की स्पेशल एससी एसटी कोर्ट में 35 साल के आरोपी कुमार सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 13 हजार रूपयों का जुर्माना भी लगाया है।
नाबालिग लड़की की गला घोंट कर हत्या
दरअसल यह घटना साल 2009 में मथुरा में घटी थी, 14 साल की दलित बच्ची जब पानी लेने के लिए सार्वजनिक नल पर गई थी तो आरोपी ने उस पर जातिसूचक बातें कहते हुए दुर्वव्यावहार किया था। लेकिन दलित बच्ची ने हिम्मत दिखाई, और इसकी शिकायत पंचायत में की, जिसके बाद भी आरोपी ने जाति आधारित धमकी दी थी। उसी दोपहर को नाबालिग लड़की की गला घोंट कर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने मामले को दर्ज करके जब जांच शुरु की तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई।
कोर्ट ट्रायल से पहले सरेंडर
पुलिस ने शक के आधार पर जब कुमार सिंह की तलाश शुरु की तो कोर्ट ट्रायल से पहले ही उसने सरेंडर कर दिया और वो बेल पर बाहर आ गया, वो लगाताक कह रहा था कि उसे फसाया जा रहा है घटना के वक्त वो वो अपने परिवार के साथ खेतों में काम कर रहा था, दलित लड़की को उसी के परिवार ने मारा है लेकिन कोर्ट ने गवाहो और सबूतो के आधार पर कुमार को दोषी ठहराया, और उसे आखिरकार 16 साल बाद सजा सुनाई गई।



