Aligarh Gang-rape Case: हाल ही में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के अलीगढ (Aligarh) से एक खबर सामने आई है। जहाँ एक दलित लड़की के साथ गैंग रेप हुआ था। जिसके 23 साल बीत जाने के बाद अब पीड़िता को न्याय मिला हैं। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए दो रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर के साथ 7 आरोपियों को 20-20 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही जुर्माना भी लगाया हैं। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से आपको बताते हैं।
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लम्बे इंतज़ार के बाद पीड़िता को मिला न्याय
दलितों महिलाओ के साथ आज रेप-बलात्कार के मामले इस कदर बढ़ चुके है कि उनका घरो से निकालना मुश्किल हो चूका हैं. मनुवादी सोच के लोग जब मर्जी दलितों को अपना शिकार बना लेते हैं. ऐसा ही एक ममला उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से सामने आया हैं सामने आया हैं जहां एक दलित लड़की को अपने साथ हुई गैंग रेप जैसे विभत्व पीड़ा के न्याय के लिए 23 सालों का लंबा इंतजार करना पड़ा। ये घटना 30 अक्टूबर 2002 की है जब यूपी के अलीगढ़ जिले के खैर थाना (Khair Police Station) क्षेत्र में एक 17 साल की दलित नाबालिक बच्ची का सुबह शौच के लिए जाते समय पहले अपहरण किया गया और फिर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था।
7 आरोपियों को 20–20 साल की सजा
पीड़ित बच्ची को करीब 2 महीनों बाद 26 दिसंबर को हामिदपुर से बरामद किया गया था। जिसके बाद से पिछले 23 सालों से ये मुकदमा कोर्ट में लंबित था, लेकिन आखिरकार दलित पीड़ित को न्याय मिला और एडीजे फास्ट ट्रैक प्रथम अंजू राजपूत ने 7 आरोपियों को 20-20 साल की सजा सुनाई है। जिसमें से दो रिटायर पुलिस अधिकारी भी शामिल है। इस मामले ने 2023 में काफी तूल पकड़ा था, जिसके बाद से इसकी जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी दी गई थी।
60-60 हजार रुपए का जुर्माना
जिसके बाद इस मामले में गांव के ही रामेश्वर, उसका भाई प्रकाश, खेमचंद, राकेश मौर्य, साहब सिंह जय प्रकाश, के साथ साथ तत्कालीन एसएचओ रामलाल वर्मा, उनका बेटा बॉबी और सरोजिनी नगर के एसएचओ पुत्तूलाल प्रभाकर शामिल है। जिसमें साहब सिंह की मौत हो गई है और राकेश मौर्य को मुकदमे से बाहर कर दिया गया था। कोर्ट ने मुख्य आरोपी रामेश्वर, प्रकाश और रामलाल पर 60-60 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है और बाकी आरोपियों पर 50 हजार का जुर्माना लगा है।



