Athawale’s sharp attack: पिछले कुछ दिनों से, मुख्य न्यायाधीश बी.आर गवई (CJI BR Gavai) पर जूता फेंके जाने का मुद्दा मीडिया में गरमागरम है। राजनीतिक दलों ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए अपने-अपने अभियान शुरू कर दिए हैं। पहले कांग्रेस पार्टी के राहुल गांधी, फिर आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Former CM Arvind Kejriwal) और अब केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले (Ramdas Athwale), ने इस घटना की तीखी आलोचना की है। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे ममाले के बारे में विस्तार से बताते हैं।
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रामदास आठवले का बयान
आज समाज में इतने बदलवा होने के बाद भी दलितों के साथ अत्यचार हो रहे है चाहे फिर कोई बड़े पद बैठा व्यक्ति ही क्यों न हो…मनुवादी सोच दलित पर इस कदर हावी हो रही है कि लोग होश-हवस भूल जाते है और जूता उठकर मरने की कोशिश करते है. ऐसा ही एक ममला दिल्ली सुप्रीम कोर्ट से सामने आया था. जहाँ चीफ जस्टिस पर जूता फेंका गया था और तब से ये मामला तूल पकड़ते जा रहा है।
दरअसल, चीफ जस्टिस पर जूता फेंकने का मामला अब एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है अलग-अलग नेताओं के इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया को देखते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है एक तरफ विपक्ष बीजेपी को घेरने में लगा है और उन्हें दलित विरोधी बताने की कोशिश कर रहा है तो वही केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने इस मुद्दे पर काफी तीखा प्रहार किया है।
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दलित और पिछड़ी जाति से चीफ जस्टिस बने
उन्होंने कहा कि देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार केवल इसीलिए हो पाया है क्योंकि वह एक दलित समाज से है जो कि सवर्णों को कभी पसंद किया आया कि कोई दलित और पिछड़ी जाति से चीफ जस्टिस बने। उन्होंने कहा कि इस घटना को अंजाम देने वाले वकील राकेश किशोर पर SC-ST act के अधिनियम के तहत मामला चलाया जाना चाहिए।
चीफ जस्टिस आज जिस पद पर है वो उनकी मेहनत का नतीजा है। उनके पिता केरल और बिहार के राज्यपाल थे…लेकिन उन्होंने मेहनत की, पढ़ाई की और वो बॉम्बे हाईकोर्ट के वकील बने। उन्होंने सालों कठोर परिश्रम किया तब जाकर वो चीफ जस्टिस बने है। उनके साथ इस तरह का व्यवहार कभी किसी भी कीमत पर बर्दास्त नहीं किया जाएगा।



