Ayodhya Ram Mandir: हाल ही में, उत्तर प्रदेश के चिल्लूपार से सात दलित प्रतिनिधियों को राम मंदिर में होने वाले ध्वजारोहण के महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने के लिए अयोध्या भेजा गया है। राम मंदिर ट्रस्ट ने इस कार्यक्रम को “सर्वस्पर्शी” बनाने का निर्णय लिया है, जिसमें अनुसूचित जाति और जनजाति के हजारों लोगों को आमंत्रित किया गया है।
ध्वजा में अयोध्या का इतिहास
अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर पीएम मोदी (PM Modi) ने केसरिया ध्वज लहराया, इस दौरान जय श्री राम के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा, राम मंदिर पर धर्म ध्वज का लहराना वैभव का प्रतीक है, ध्वज पर सूर्य का चिह्न, सूर्य के मध्य में ‘ॐ’ और साथ में कोविदार वृक्ष अंकित है। ध्वजा में अयोध्या का इतिहास, सूर्यवंश की परंपरा और रामायण की गहराई छिपी है। इस ध्वजा को गुजरात के अहमदाबाद के कश्यप मेवाड़ और उनकी 6 कारीगरों की टीम ने बनाया है। आपको बता दें कि, हिंदू धर्म में मंदिर पर ध्वजा फहराने की परंपरा बहुत पुरानी है, गरुड़ पुराण के अनुसार, मंदिरों पर फहराया गया ध्वज देवता की उपस्थिति को दर्शाता है और जिस दिशा में वह लहराता है, वह क्षेत्र पवित्र माना जाता है।
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ध्वाजारोहण समारोह में दलित समाज को भी शामिल
वही यूपी (UP) के अयोध्या (Ayodhya) से एक खबर सामने आई है, जहां राम मंदिर (Ram Temple) में होने वाले ध्वाजारोहण समारोह को लेकर दलित समाज के लिए बड़ी खुशखबरी और सम्मान की खबर सामने आई है। दरअसल इस ध्वाजारोहण समारोह में दलित समाज को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया। यूपी के गोरखपुर (Gorakhpur) के बुढ़ानापुरा (Budhanapura) के चिल्लूपार (Chillupar) क्षेत्र से 7 लोगो को चयनित किया गया है जो अयोध्या में दलित समाज का प्रतिनिधित्व करेंगे।
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ध्वाजारोहण कार्यक्रम में दलितों को सम्मानित किया
इसके लिए चिल्लूपार के विधायक राजेश त्रिपाठी (MLA Rajesh Tripathi) ने खुद माला अर्पण करके उन्हें सम्मान के साथ आयोध्या (Ayodhya) भेजा है। इन सातो को राम मंदिर ट्रस्ट (Ram Mandir Trust) की तरफ से दलित समाज (Dalit society) का प्रतिनीधि करने के लिए बुलाया गया है, ताकि ध्वाजारोहण कार्यक्रम (Flag hoisting ceremony) में दलितों को भी सम्मानित किया जा सकें। बता दें कि आज होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम में खुद पीएम मोदी ने मंदिर के शिखर पर 22 फीट लंबे-11 फीट चौड़े ध्वज का रोहण किया और मंदिर निर्माण कार्य पूरा होने की घोषणा की है। इतने बड़े कार्यक्रम में दलित समाज को सम्मानित करना कहीं न कहीं समाज में दलितों को बराबरी का सम्मान देने के प्रति एक सकारात्मक कदम है।



