Basti: दलित की जमीन हड़पने के लिए गढ़ा फर्जी आदेश, बस्ती प्रशासन में मचा बवाल

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Dalit land fraudulently occupied: हाल ही में उत्तर प्रदेश (UP) के बस्ती (Basti) से एक सनसनी खेज ममला सामने आया है. जहाँ  फर्जी आदेश देकर दलित व्यक्ति की जमीन पर कब्ज़ा कर लिया गया है और जब दलित व्यक्ति ने इस बात का विरोध किया तो उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया. इसके बाद दलित व्यक्ति ने अब जमीन की जांच के जिलाधिकारी को पत्र देकर जांच की मांग की है. तो चलिए आपको इस लेख में पूरे ममाले के बारे में विस्तार से बताते हैं.

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धोखे से किया दलित की जमीन पर कब्जा

हर दिन दलितों के साथ अत्यचार की खबर सामने आती है. कभी उनके साथ मारपीट तो कभी उनके साथ उंच-नीच छुआछूत तो कभी भेदभाव या फिर जोर-जबरदस्ती से उनकी जमीनों पर फर्जी कब्ज़ा कर दिया जाता है. लेकिन कब तक इस तरह की घटना सामने आती रहेगी आखिर कब दलितों को एक सम्मान अधिकार मिलेंगे? ऐसा ही दलित उत्पीड़न की खबर यूपी के बस्ती जिले के खम्हरिया गांव से सामने आई है. जहाँ फर्जी आदेश देकर दलित की जमीन पर मनुवादियों ने कब्ज़ा कर लिया है.

दस्तावेजों में दर्ज नाम के आधार पर रजिस्ट्री

दरअसल, खम्हरिया गाँव में एक दलित व्यक्ति के नाम फर्जी आदेश के आधार पर नामांतरण का मामला सामने आया है. एक कानूनी सलाहकार ने जिलाधिकारी (District Magistrate) को पत्र लिखकर जाँच की माँग की है. वही इस घटना को लेकर नायब तहसीलदार ऋषभ सिंह ने बताया कि भू-अभिलेखों और अन्य दस्तावेजों में दर्ज नाम के आधार पर ही रजिस्ट्री होती है. इस मामले में कोई लापरवाही नहीं बरती गई है.

लेकिन सिकंदरपुर क्षेत्र के खम्हरिया गांव के रतन पुत्र सतई की मृत्यु के बाद उनके भतीजे रमेश और गणेश पैतृक संपत्ति के वारिस बने. इस बीच, भू-माफिया ने गाँव के ही सहज राम को विश्वास में लेकर ग्राम सभा बनाम सहज राम नाम से एक झूठा मुकदमा दायर कर दिया. इस फैसले के आधार पर ज़मीन सहज राम के नाम कर दी गई. इसके बाद, भू-माफिया ने मंजू गुप्ता, प्रेम कुमार सिंह और अब्दुल हमीद के नाम से ज़मीन का बैनामा करवा लिया.

दस्तावेज़ों की जाँच तो चौंकाने वाले खुलासे

वही जब ज़मीन के दस्तावेज़ों की जाँच की गई तो चौंकाने वाले खुलासे हुए जिसने सबको चौंका दिया. जब पीड़ित, दलित व्यक्ति और अन्य लोगों ने वकील अरबी रोशन को ज़मीन के दस्तावेज़ दिखाए और केस फ़ाइल की जाँच करवाई, तो पता चला कि तहसील या ज़िले में कोई केस फ़ाइल ही उपलब्ध नहीं थी. इसके अलावा, तहसील के रिकॉर्ड में ज़मीन ग्राम सभा के नाम पर एक फ़ैसले के आधार पर दर्ज दिखाई गई थी.

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