BJP leader beats up Dalit family: हाल ही में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मैनपुरी (Mainpuri) से चौकाने वाले खबर सामने आई है. जहाँ बीजेपी (BJP) के जिला मंत्री की गाड़ी को साइड न देने पर गुस्साए मंत्री जी ने एक दलित परिवार को पीट दिया. इतना ही नहीं उन्होंने दलित परिवार को जातिसूचक शब्दों से अपमानित भी किया. जिसके बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है. तो चलिए आपको इस लेख में पूरे ममाले के बारे में विस्तार से बताते हैं.
दलित परिवार के साथ मारपीट
समानता, स्वतंत्रता और न्याय की बातें भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा की नींव कही जाती हैं लेकिन जिन सिद्धांतों पर भारतीय संविधान की बुनियाद रखी गई, वह आजादी के 78 साल बाद भी जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाई है. सदियों तक सामाजिक भेदभाव और शोषण सहने वाला दलित समाज आज भी अनेक रूपों में उत्पीड़न का शिकार हो रहा है. हर दिन देश के हिस्सों से तमाम ऐसे मामले सामने आते हैं, जो देश के शोषित दलितों की स्थिति पर सवाल उठाते हैं. ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के मैनपुरी से सामने आई है, जहां बीजेपी के जिला मंत्री की गाड़ी को साइड न देने पर गुस्साए मंत्री जी ने एक दलित परिवार को पीट दिया. दरअसल, ये मामला मैनपुरी के किशनी (Kishni) क्षेत्र का है.
जहां बीजेपी (BJP) जिला मंत्री हरिओम दुबे और उनके भाई अंकित दुबे ने एलाऊ थाना क्षेत्र के परिगवां गांव के रहने वाले एक दलित परिवार के साथ न केवल बुरी तरह से मारपीट की बल्कि उनके साथ मौजूद दलित महिलाओं के भी कपड़े फाड़ दिए. उन्हें जातिसूचक गालियां दी गई. मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकरी के अनुसार पीड़ित परिवार ने बताया कि वो ईको गाड़ी से कुमहौल गांव में होने वाले मेले में भंडारा कराने के लिए जा रहे थे, तभी बीजेपी जिला मंत्री की गाड़ी पीछे से साइड मांगने लगी.
पुलिस ने किया मामला दर्ज
लेकिन ज्यादा ट्रैफिक के कारण वे लोग साइड नहीं दे सकें, जिसके कारण दोनों काफी गुस्सा हो गए और अपनी कार को ईको के आगे खड़ी करके उन्हें जातिसूचक गालियां देते हुए मारपीट शुरू कर दी. इसी बीच दबंगो ने 6-7 और अज्ञात लोगो को बुला लिया और दलित परिवार को लाठी डंडो से पीटना शुरु कर दिया. वहीं, पुलिस ने मामले को दर्ज कर लिया और जांच शुरु कर दी है. वहीं, बीजेपी जिला मंत्री के भाई अंकित दूबे ने भी क्रॉस केस करते हुए मारपीट और सोने की चैन चोरी होने का मामला दर्ज कराया है. वही अब देखना होगा की मामले की निष्पक्ष जाँच होती है या नहीं क्या दलित परिवार को न्याय मिल पायेगा या नहीं.



