Badaun rape case: हाल ही में उत्तर (UP) प्रदेश के बदायूं (Badaun) से खबर सामने आई हैं। जहाँ दलित नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को 7 सालों के बाद आखिरकार न्याय मिला हैं। वही आरोपी को आजीवन कारावास की सजा और 61 हजार रूपय का जुर्माना लगाया है।
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दलित नाबालिग से दुष्कर्म
जब दलितों के लिए न्याय की बात आती है, तो समझ नहीं आता कि प्रशासन क्यों सो जाता है और दलितों को न्याय मिलने में वर्षों लग जाते हैं। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के बदायूं से है, जहां आखिरकार दलित नाबालिक दुष्कर्म पीड़िता को 7 सालों बाद ही सही न्याय मिल ही गया। साथ ही स्पेशल जज पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) दिनेश तिवारी की अदालत (Court) ने दोषी धर्मेंद्र मिश्रा उर्फ छोटू को आजीवन कारावास की सजा और 61 हजार रूपय का जुर्माना लगाया है।
दरअसल 29 मार्च 2018 को दातागंज कोतवाली (Dataganj police station) पुलिस को नाबालिग दलित पीड़िता की मां ने तहरीर दी कि उनकी बेटी 6 मार्च को गांव के ही परचुन की दुकान पर सामान लाने गई थी, तभी गांव के ही धर्मेंद्र मिश्रा ने उसका रास्ता रोका और उसपर तमंचा तान दिया। पीड़िता इससे पहले ही कुछ कह पाती वो जबरन उसे डहरपुर कलां (Daharpur Kalan) के प्राथमिक स्कूल परिसर में ले गया और वहां उसके साथ दुष्कर्म किया।
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7 साल बाद दलित नाबालिग को मिला न्याय
पीड़िता ने बताया कि वो उसे जान से मारना चाहता था लेकिन वहां टहल रहे उसके दो दोस्तों ने उसे रोक दिया था। वही पीड़िता डरी सहमी नाबालिग लड़की जब घर पहुचीं तो वो किसी को कुछ नहीं बता सकीं थी, लेकिन 18 मार्च को उसने अपनी मां से सबकुछ बता दिया। जिसके बाद पीड़िता का मां ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया। हालांकि ये मामला 7 सालों से कोर्ट में चल रहा था, लेकिन आखिरकार पीड़िता को न्याय मिला और आरोपी सलाखो के पीछे पहुंच गया है।
लेकिन इस घटना के बाद मन में सवाल उठता है कि आखिर कब तक दलित बच्चियों के साथ ऐसी मारपीट जबरन रेप जैसी घटनाएं होती रहेंगी? क्या सरकार की ऐसी घटनाओं को रोकने की कोई ज़िम्मेदारी नहीं है? या मनुवादी दबंगों ने दलितों पर अत्यचार करने का अपना हक़ मन लिया हैं।



