Dr. B. L. Bairwa: कहते है कि जब किसी ने आसमान छूने की ठानी को जाति, धर्म के सारे बंधन टूट ही जाते है। एक कहावत है खुदी को कर बुलंद इतना कि खुदा भी तुझसे पूछे की बंदे बता तेजी रजा क्या है। इस कहावत को सार्थक कर दिखाया है राजस्थान के एक दलित समाज से आने वाले न्यूरो सर्जन डॉ बी एल बैरवा ने। दरअसल पिछले सप्ताह खबर आई थी कि राजस्थान के भीलवाड़ा के रजाक मंसूरी नाम के एक मरीज के शरीर के लिवर के दाहिने हिस्से में 500 से ज्यादा छोटी-छोटी गांठें, जिन्हें हाइडेटिड सिस्ट कहा जाता है।
महिला के शरीर से 300 सिस्ट निकाले
उसे 3 घंटे के जटिल ऑपरेशन से निकाल लिया गया और मरीज को पूरी तरह से सुरक्षित बचा लिया, इतने बड़े ऑपरेशन को करने का श्रैय जाता है दलित समाज से आने वाले एक डॉक्टर वरिष्ठ सर्जन डॉ. बी.एल. बैरवा को। डॉ बैरवा का जब आप नाम सुनते है तो आपको उनके किए गए इलाजों का लिस्ट काफी लंबी मिल जायेगी… इतना ही नहीं कुछ समय पहले भी डॉ बैरवा ने हाईडेटिड सिस्ट डिजीज से पीड़ित एक महिला के शरीर से 300 सिस्ट निकाले थे। डॉ बैरवा की इस उपलब्धि के लिए उनका नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन में भी दर्ज किया गया था।
मरीज के लीवर में 500 से ज्यादा गांठे
डॉ बैरवा से सर्जरी कराने वाले मरीज रजाक मंसूरी ने बताया कि उन्हें इलाज से पहले काफी डर लग रहा था, वो पिछले 3 सालो से असहनीय दर्द से गुजर रहे थे, काफी जगह दिखाने के बाद अंत में चित्तौड़गढ़ के प्राइवेट हॉस्पीटल में डॉ बी के बैरवा से मिले थे। डॉ बैरवा ने सीटी स्कैन करावाया और जांच में पाया गया कि मरीज के लीवर में 500 से ज्यादा गांठे है। और जल्द से जल्द ऑपरेशन कराने की सलाह दी। मरीज ने बताया कि 3 घंटे तक ऑपरेशन चला और उन्हें 3 सालो से असहनीय दर्द से छुटकारा मिला। वो 500 सिस्ट करीब 5 किलो के थे, सोचने वाली बात है कि किस तरह से 5 किलो वजन लेकर मरीज 3 सालो से असहनीय दर्द सह रहा था। हालांकि अब मरीज बिल्कुल ठीक है।
डॉक्टर होने के साथ साथ समाज सुधारक
डॉ बैरवा एक डॉक्टर होने के साथ साथ समाज सुधार के लिए भी बड़ा योगदान देते है। वो भी बाबा साहब अंबेडकर की ही तरह शिक्षा को सामाजिक उत्थान का सबसे बड़ा साधन मानते है। वो समाज में एकता, भाईचारा और युवाओ को शिक्षा के प्रति जागरूक करते है। उनका कहना है कि शिक्षित होकर की प्रगति के रास्ते को प्रशस्त किया जा सकता है। डॉ बी एल बैरवा जिनका पूरा नाम डॉ. बनवारी लाल बैरवा है वो एक प्रोफेशनल एक्सीलेंस, सीनियर कंसल्टेंट जनरल और एडवांस्ड लैप्रोस्कोपिक सर्जन है।
मेडिकल क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राजस्थान के हेल्थ मिनिस्टर और RUHS के वाइस चांसलर ने “अवार्ड ऑफ़ एक्सीलेंस” से सम्मानित किया है। डॉ बैरवा जैसे सम्मानित लोग समाज के लिए एक प्रेरणा है और प्रेरणा है दलित समाज के लिए, जो दलितो को शिक्षित होने और हर बाधाओं को पार करके आगे बढ़ने की, सफल होने की सीख देते है। डॉ बैरवा के इस साहसिक कार्य के लिए दलित समाज ही नहीं बल्कि हर कोई शुक्रगुजार रहेगा।



