Shahjahanpur news: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शाहजहांपुर (Shahjahanpur) से खबर सामने आई है, जहां एक नाबालिक दलित को उसके साथ हुई तीन दिनों तक बर्बरता के मामले में आखिरकार 5 सालों के लंबे इंतजार के बाद न्याय मिला है। इस मामले में आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
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दो आरोपियों को आजीवन कारावास
जब किसी दलित के साथ उत्पीड़न होता है तो वाकई में अंधा कानून सही मायने में परिभाषित हो जाता है। क्योंकि न तो उनकी अर्जी एक बार में सुनी जाती है और न ही उनकी सुनवाई होती है। महीनों लग जाते है केवल मामला दर्ज कराने में..तो जरा सोचिये न्याय को कितना समय लगेगा। ऐसा ही एक मामला शाहजहांपुर (Shahjahanpur) के मदना पुर (Madna Pur) से सामने आया है। जहां एक 15 साल के बच्ची का अपहरण करके और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने के मामले दो आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
दलित नाबालिग के साथ गैंगरेप
पीड़िता की मां वादिनि के मुताबिक 6 जुलाई 2020 के दिन वो अपने एक रिश्तेदार को अस्पताल में देखने गई थी, इसी बीच उसकी 15 साल की नाबालिक बच्ची जब करीब रात को 8 बजे वो शौच के लिए बाहर निकली थी, तो गांव के कुछ दबंग मोनू सिंह और दिनेश ने उसका अपहरण कर लिया था, और उसके साथ गैंगरेप कि घटना को अंजाम दिया था। पुलिस जांच कर ही रही थी लेकिन करीब 3 दिनों बाद बच्ची बेहद बुरी हालत में घर लौटी और पुलिस को आपबीती सुनाई थी।
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5 सालों तक कोर्ट में चला मामला
पीड़िता के बयान के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। बच्ची ने आपबीती सुनाई थी कि तीन दिनों तक उसे बंधक बनाए रखा और उसका सामूहिक दुष्कर्म किया था। वो किसी तरह से बच निकली और सीधा अपनी मां के पास पहुंची। वही पीड़िता का बयान दर्ज किए और विवेचना पूरी कर आरोप पत्र न्यायालय को भेजा।
हालांकि इस मामले में पिछले 5 सालों से कोर्ट में मामला चल रहा था जिसके बाद आखिरकार बच्ची को न्याय मिला। दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा और एक एक लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इतना ही नहीं न्यायालय ने दोनों अभियुक्तों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (डी), पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 और अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(2) (वी) के अंतर्गत दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।



