खड़गे ने दलितों-आदिवासियों के मुद्दे पर BJP-RSS को घेरा, कहा- बढ़ता अपराध देश के संविधान पर हमला

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Mallikarjun Kharge attacks on BJP: पिछले कुछ दिन पहले यूपी के रायबरेली में मॉब लिंचिंग की एक घटना सामने आई थी, जहाँ एक दलित युवक की हत्या की गयी थी। जिसे लेकर कई दलित संगठन ने मोर्चा खोला था और मृतक युवक के न्याय की मांग की थी। हर दिन इस ममाले को एक नया अपडेट सामने आ रहा है।

वही अब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) ने भी इस ममाले को लेकर बीजेपी पर निशाना सदा है और एनआरसीबी (NCRCB) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए दलितों के साथ उत्पीड़न की कड़ी निंदा की है. तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे विस्तार से बातते हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी पर साधा निशाना

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul gandhi) और मल्लिकार्जुन खड़गे ने उत्तर प्रदेश के रायबरेली में 38 वर्षीय दलित व्यक्ति की हत्या की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह घटना देश के संविधान और दलित समुदाय के विरुद्ध एक गंभीर अपराध है। दरअसल, बीते कुछ दिनों में दलित युवक के साथ मॉब लिंचिंग करके हत्या और दलित आईपीएस (IPS) अधिकारी की आत्महत्या को लेकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (National President Mallikarjun Kharge) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर जमकर हमला बोला है।

एनआरसीबी की रिपोर्ट का जिक्र

वही खड़गे ने एनआरसीबी (NCRCB) की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि 2013 से 2023 तक में दलितों के खिलाफ 46 प्रतिशत और आदिवासियों के खिलाफ 91 प्रतिशत अपराधों में बढौतरी हुई है। बीजेपी शासित राज्यों की हालत तो और ज्यादा बदतर है। वहीं बीजेपी सरकार की दलितों के प्रति उदासीनता के कारण ही पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) का अपमान हुआ है। ये केवल बीजेपी (BJP) और आरएसएस (RSS) के सामंतवादी सोच को दर्शा रहा है कि भविष्य में ये कितना खतरनाक साबित होने वाला है।

बीजेपी का शासन दलितों और पिछड़ों के लिए अभिशाप

इस तरह की घटना केवल संविधान, सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांत पर गहरा प्रहार है। बीजेपी की सामंतवादी सोच का खामियाज देश के पिछड़े दलित और आदिवासी लोग भुगत रहे है। इतना ही नहीं उन्होंने पीएम मोदी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बीजेपी का शासन दलितों और पिछड़ों के लिए अभिशाप बन गया है। और वहीं पीएम मोदी इन मामलों के मूक दर्शक बन कर देखते है। चुप्पी साधे रहते है।

मौजूदा समय में हालत ऐसे है कि चाहे कोई कितने भी ऊंचे पद पर हो, लेकिन अगर वो दलित है तो उसका उत्पीड़न मनुवादियों के लिए उनका जन्मसिद्ध अधिकार बन जाता है। और हैरानी की बात है कि इसके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। ये स्थिति बेहद ही भयावह है।

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