कांशीराम जयंती को लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में काफी समय से सरगर्मियां तेज हो गई हैं। दलित राजनीति के इस ‘मसीहा’ की विरासत पर हक जताने के लिए विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच मची होड़ ने सूबे के सियासी पारे को गरमा दिया है। इसी कड़ी में राहुल गांधी का लखनऊ दौरा साफ़ संकेत दे रहा है कि 2027 के चुनावी दंगल से पहले दलित वोट बैंक को साधने की जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
बता दें कि कांशीराम जयंती को लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मियां तेज हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज लखनऊ पहुंच चुके हैं। वह गोमती नगर स्थित इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपीटर हॉल में आयोजित ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ सम्मेलन में शिरकत कर रहे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 1:00 बजे से हो चुकी है, जिसमें प्रदेश भर से आए दलित विद्वान और सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं। राहुल गांधी दोपहर लगभग 3:30 बजे इस सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ के रूप में आयोजन
Indian National Congress इस कार्यक्रम को ‘सामाजिक परिवर्तन दिवस’ के रूप में मना रही है। सम्मेलन में संविधान की रक्षा, सामाजिक न्याय और दलित, पिछड़े, आदिवासी, युवा तथा महिलाओं के अधिकार जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। राजनीतिक जानकार इसे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के कमजोर पड़ चुके सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं, खासकर दलित और पिछड़े वर्गों के बीच।
कांशीराम जयंती से पहले खास संदेश
यह कार्यक्रम 15 मार्च को होने वाली Kanshi Ram की जयंती से ठीक पहले हो रहा है। कांशीराम बहुजन राजनीति और दलित चेतना के बड़े प्रतीक माने जाते हैं। ऐसे में उनकी जयंती से पहले इस तरह का आयोजन करना राजनीतिक तौर पर भी काफी प्रतीकात्मक माना जा रहा है। हालांकि Rahul Gandhi का 11 मार्च को Raebareli दौरा टल गया था, लेकिन लखनऊ के इस कार्यक्रम को प्राथमिकता दी गई। इससे यह संकेत मिल रहा है कि कांग्रेस मिशन-2027 के तहत उत्तर प्रदेश की राजनीति पर खास ध्यान दे रही है।
कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति की बात करें तो Bahujan Samaj Party का प्रभाव अभी भी काफी मजबूत माना जाता है, खासकर जाटव समुदाय में। वहीं दूसरी ओर Bharatiya Janata Party ने भी पिछले दस सालों में दलित वर्गों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की है और सरकारी योजनाओं के जरिए अपना समर्थन बढ़ाया है। इसके अलावा Samajwadi Party भी राज्य में सक्रिय है। ऐसे में कांग्रेस के लिए दलित और पिछड़े वोट बैंक में बड़ी जगह बनाना आसान नहीं माना जा रहा।
375 ‘न्याय योद्धा’ तैनात करने की तैयारी
इसी बीच कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारी भी तेज कर रही है। पार्टी पूरे उत्तर प्रदेश में 375 ‘न्याय योद्धा’ नियुक्त करने की योजना बना रही है। इनकी जिम्मेदारी अलग-अलग इलाकों में होने वाली घटनाओं पर नजर रखना और जरूरतमंद लोगों को कानूनी मदद दिलाना होगी। जो लोग आर्थिक या अन्य कारणों से मुकदमा नहीं लड़ पाते, उनकी हर स्तर पर सहायता की जाएगी। इन ‘न्याय योद्धाओं’ की नियुक्ति की जिम्मेदारी कांग्रेस के विधि विभाग को दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बसपा के कमजोर होते जनाधार के बीच राहुल गांधी की यह सक्रियता यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव में ‘दलित-मुस्लिम-पिछड़ा’ समीकरण को कांग्रेस के पक्ष में मोड़ने की एक बड़ी कोशिश है।



