Mayawati leadership in UP: हाल ही में केंद्रीय सामाजिक न्याय (Central Social Justice) एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले (Ramdas Athwale) ने एक बयान देकर यूपी की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने कहा है कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती (Supremo Mayawati) को दलित समुदाय (Dalit Community) को एकजुट करने का बीड़ा उठाना चाहिए। जिसे लेकर सियासी हलचल शुरू हो गयी है। क्योंकि दलित समाज आज कई परेशानियों को झेल रहा है। उन्हें उनके हिस्सा का हक़ नहीं मिल पा रहा है। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताते हैं।
रामदास अठावले का बयान
उत्तर प्रदेश में 2027 चुनाव को लेकर एक बार फिर दलित वोट बैंक को घमसान शुरू हो गया है. हर कोई अपनी-अपनी पार्टियों को मजबूत करने में लगा है. वही बीते दिन रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष रामदास आठवले का स्टेटमेंट सामने आई है. जहाँ वो बोलते नजर आ रहे है कि सदियों से दलित समाज कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं और बिखरी हुई दलित पार्टियों को एक साथ आना चाहिए। उन्होंने मायावती को इस काम के लिए सबसे उपयुक्त नेता बताया, क्योंकि उनके पास अनुभव और एक बड़ी राजनीतिक ताकत है। अठावले का मानना है कि मायावती को राष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण चेहरा मानकर ही दलित राजनीति को मज़बूत किया जा सकता है।
वही उन्होंने ये भी कहा सविंधान में दलितों को समाज में अधिकार और आरक्षण दिया है, लेकिन इसके बावजूद देश के कई हिस्सों में भेदभाव और अन्याय की खबरे सामने आती है। जिस पर किसी का ध्यान नहीं जाता है और सिर्फ खबरे बन ही रह जाती है। आखिर कब दलित समाज को न्याय मिलेगा कब वो आज भी अपने अधिकारों के लड़ रहा है। वही कांग्रेस और बीजेपी जैसी बड़ी पार्टियो में दलित नेता है पर वो भी राजनितिक में स्वतंत्र नहीं है।
भाजपा द्वारा दलित वोटों को लुभाने की कोशिश
हालांकि, रामदास अठावले की इस टिप्पणी को अलग-अलग नज़रिए से देख रहे हैं। कुछ लोग इसे भाजपा द्वारा दलित वोटों को लुभाने की कोशिश मान रहे हैं, क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा के खराब प्रदर्शन के कारण दलित वोटबैंक ‘भारत’ ब्लॉक में चला गया। वहीं, कुछ का मानना है कि यह दलितों की मौजूदा स्थिति पर चिंता व्यक्त करने और उन्हें एकजुट करने की कोशिश है।
आपको बता दें, इस बयान पर मायावती या बसपा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालाँकि, मायावती पहले भी केंद्र सरकार की कुछ नीतियों का स्वागत कर चुकी हैं और कुछ पर निशाना भी साध चुकी हैं, जिससे उनके राजनीतिक रुख को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाते रहे हैं।



