प्रशासनिक लापरवाही का शिकार सेमरा गांव, गंदगी और जलभराव से जूझ रहे 50 दलित परिवार

Samera basti,Waterlogging issue
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Waterlogging in Semra village: हाल ही में यूपी के सेमरा गाँव की दलित बस्ती से एक हैरान परेशान करने वाला सामने आया है. जहाँ हरिजन बस्ती में रहने वाले 50 से अधिक दलित परिवारों को कई मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. बस्ती में टूटी नालियां और जलभराव की स्थिति लगातार बनी हुई है. लेकिन कोई इसकी सुध लेने वाला नहीं है. तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताते हैं.

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जलभराव और गंदगी के कारण परेशान

दलितों पर प्राचीन काल से ही अत्याचार और मारपीट होती रही है. लेकिन आज भी उन्हें बुनियादी सुविधाएँ मुहैया नहीं हैं। खासकर दलित बस्तियों में लोग दयनीय जीवन जी रहे हैं। कहीं जल संकट है, तो कहीं टूटी नालियाँ और सड़कें हैं. ऐसा ही एक मामला सेमरा गाँव की हरिजन बस्ती से सामने आया है, जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, खासकर जलभराव और गंदगी.कई रिपोर्टों के अनुसार, गाँव में जल निकासी की कोई उचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण बारिश का पानी और गंदा पानी जमा हो जाता है. यह स्थिति न केवल लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा है, बल्कि जीवन को भी कठिन बना देती है.

मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार, स्थानीय निवासी रामदेव ने बताया कि नालियां पूरी तरह से जाम हैं. सड़क पर वाहन गुजरने पर गंदा पानी घरों में घुस जाता है. एक अन्य निवासी रामचेत का कहना है कि उन्हें हर दिन गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है. लोग अक्सर फिसल कर गिर जाते हैं. लेकिन प्रशासन को इसकी कोई चिंता नहीं है. इसी गांव की निवासी सावित्री ने बताया कि यहां सालों से कोई सफाई कर्मचारी नहीं आया है. नालियों का पानी सड़कों पर भरा रहता है. स्थनीय लोगो द्वारा शिकायत करने के बाद भी ग्राम प्रधान इस कॉलोनी की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. जिससे सभी लोग लंबे समय से परेशान हैं.

पेयजल की स्थिति खराब

आपको बता दें कि यह पहली खबर नहीं है जहां ऐसा हुआ है. इससे पहले भी कई ऐसी खबरें सामने आ चुकी हैं जहां दलित बस्तियों का हाल बुरा देखने को मिला है. बहादुरपुर विकास खंड के पिड़ावल गांव में पीने के पानी का बुरा हाल है. नल के पास गड्ढों में गंदा पानी जमा है. ग्रामीणों का कहना है कि यहां न तो प्रधान आते हैं और न ही कोई अधिकारी. लोगों का कहना है कि जलभराव के कारण बस्ती में मच्छरों की संख्या बहुत ज्यादा है. निवासियों को मलेरिया और डेंगू का खतरा है. आजादी के 75 साल बाद भी इस बस्ती के लोगों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं.

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