Prayagraj: दलित मजदूर गुलाब कली को न आवास मिला – न शौचालय, टीन शेड में रहने को मजबूर

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Prayagraj news: हाल ही में प्रयागराज (Prayagraj) के कोरांव (Koraon) से एक चौकाने वाली खबर सामने आई है। जहाँ एक दलित मजदूर को अभी तक सरकारी आवास या शौचालय नहीं मिला है। घर न होने के कारण परिवार टिन शेड के नीचे रह रहा है। क्योंकि उनके मकान की हालात जर्जर हाल में हैं। तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताते हैं।

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जर्जर मकान में रहने को मजबूर

दलितों की स्थिति आज इतनी ज्यादा ख़राब हो चुकी ही है कि वो बुनयादी सुख-सुविधाओं के लिए भी मोहताज़ हो चुके ना तो उनके पास रहने को घर है न 2 वक़्त की रोटी खाने को पैसा न ही रोजगार…ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से सामने है। जहां एक दलित परिवार की स्थिति इतनी खराब है कि वो एक जर्जर मकान में रहने को मजबूर है, जो कभी भी गिर सकता है।

नहीं मिली शौचालय सुविधा 

दरअसल यह, खबर प्रयागराज के कोरांव विकासखंड (Koraon development block) स्थित डीही खुर्द गांव (Dehi Khurd village) की है। जहां सूर्य कली और उनके पति राम सुमेर ने एक अर्जी दी है जिसमें उन्होंने बताया कि वो एक चमार जाति है। जहां गरीबों और मजदूरो को सरकारी योजनाओं के लाभ दिए जा रहे हैं वहीं उन्हें अब तक सरकारी आवास या शौचालय जैसी किसी योजना का लाभ नहीं मिला है। भारी बारिश में उनका जर्जर मकान कभी भी ढह सकता है।

उन्होंने अपनी स्थिति को लेकर ग्राम प्रधान से भी अर्जी दी थी वही ग्राम प्रधान पति रामानुज की पत्नी रेखा देवी को बताई। तो उन्होंने उसे कहा की जब सरकार की तरफ से जवाब आएगा तो उन्हें इसका लाभ दिया जाएगा। जबकि दलित बुजुर्ग कितनी बार अर्जी दे चुके है। वही प्रधान ने बुजुर्ग व्यक्ति से कहाँ उन्होंने उसका नाम सर्वे सूची के लिए भेज दिया है। इसके अलवा गाँव में रहने वाले सूर्य लाल, सूर्य कली, शाम कली, राम कृपाल और विजय शंकर भी शामिल हैं जिन्हें अभी तक सरकारी सुविधा का लाभ नहीं मिला हैं।

सरकार की तरफ कोई सुविधा नहीं मिली 

हालात ऐसे है कि अब दलित बुजुर्गो ने सरकार की तरफ से मदद मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी है। उनका कहना है कि सरकार के पास उनके जैसे दलितों और गरीबों के लिए कोई योजना नहीं है। वहीं गांव के लोगों ने भी दलित बुजुर्गो की स्थिती को लेकर चिंता जताई है और जल्द से जल्द सरकार को उनके लिए कोई ठोस कदम उठाने की अपील की है।

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