Hamirpur: गैंगरेप और एसिड अटैक की शिकार नाबालिग ने तोड़ा दम, पुलिस ने 2 हैवानों को पकड़ा

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Hamirpur news: हाल ही में उत्तर प्रदेश के हमीरपुर से एक दिल दहलाने वाली एक खबर सामने आई है। तीन लोगों ने एक दलित टीनएज लड़की के साथ गैंगरेप किया, फिर उसे ज़बरदस्ती एसिड पिलाया और भाग गए। पीड़िता को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक महीने के इलाज के बाद उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

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16 साल की नाबालिग से गैंगरेप

उत्तर प्रदेश (UP) के हमीरपुर (Hamirpur) से चौकाने वाली खबर सामने आई है, यूपी जो कि धीरे धीरे दलितों के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है..एक 14 साल की निषाद समाज से आने वाली मासूम दलित बच्ची के साथ 3 लोगो ने मिलकर पहले तो गैंगरेप किया और फिर वो अपना मुंह न खोल पायें, इसलिए उसके मुंह में बेट्री में डाले जाना वाला तेजाब का पानी पिला दिया।

हमीरपुर के जलालपुर थाना (Jalalpur Police Station) क्षेत्र में घटित हुई ये घटना 28 अक्टूबर को घटी थी, जब पीड़िता के साथ उसकी ही घर की छत पर उसके ही 3 रिश्तेदारों ने रात को करीब 12 बजे बर्बरता की और फिर उसे तेजाब पिला कर फरार हो गये। तेजाब के कारण उसकी आंतों में गहरे घाव हो गए, जिससे लगातार रक्तस्राव और दर्द होता रहा।

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हैवानियत के बाद पिलाया तेजाब

इस घटना के पीड़िता को उसके परिजनों ने पीड़िता को गंभीर हालत में सरीला सीएचसी (Sarila CHC) पहुंचाया, जहां से उसे झांसी मेडिकल कॉलेज (Jhansi Medical College) रेफर कर दिया गया। झांसी में 12 दिन तक भर्ती रहने के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद परिजन उसे पीजीआई लखनऊ (PGI Lucknow) ले गए, जहां इलाज का खर्च लगभग आठ लाख रुपये बताया गया। आर्थिक तंगी के कारण पिता उसे वापस हमीरपुर ले आए।

लेकिन करीब 1 महीनों तक मौत से जंग लड़ने वाली पीड़िता प्रशासन की लापरवाही के कारण ये जंग हार गई। करीब 1 महीने तक से 7 अस्पतालों में रेफर किया गया, जहां कहीं वार्ड खाली नहीं है तो कहीं बेड नहीं है, इसका हवाला देकर उसे इधर से उधर भेजते रहे। हैरानी की बात है कि विधायक और सांसद सभी से मदद मांगी गई लेकिन कोई भी नींद से नहीं जागा। वहीं मृतका के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है, और सारी जिम्मेदारी उसकी मां पर थी।

पुलिस ने हैवानों को पकड़ा

वहीं तीन आरोपी में एक 13 साल का नाबालिक भी है, जिसे पुलिस ने पकड़ कर बाल सुधार गृह भेज दिया है। और बाकियों की तलाश जारी है। इस घटना को लेकर भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने अपना रोष व्यक्त करते हुए यूपी सरकार को घेरते हुए कहा कि दलित बच्ची की मौत का जिम्मेदार असल में स्वास्थ्य व्यवस्था, प्रशासनिक संवेदनहीनता और नेताओं की गैर-जिम्मेदारी है। क्योंकि अगर सरकार ही अपना काम ढंग से करती तो बच्ची की जान बच सकती थी। जिसकी जान बचाई जा सकती थी, लेकिन 8 लाख रूपयों के लिए सर्जरी रोक दी गई..आखिर इस मौत का जिम्मेदार कौन है..क्या वाकई में इसे रामराज्य की परिभाषा देंगे।

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