Haryana news: हाल ही में हरियाणा के हिसार से एक हैरान कर देने वाली खबर आई है. जहां एक दलित बच्चे का जन्मदिन मना रहे परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं. परिवार संगीत बजाकर जन्मदिन मना रहा था. इसी बीच नशे में धुत पुलिसकर्मी वहां पहुंच जाते हैं और संगीत बंद करा देते हैं. जिसके बाद कुछ लोग छत से पथराव करने लगते हैं. के साथ साथ गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर देते हैं. जब पुलिस उन्हें शांत करने ऊपर जाती हैं. तभी 2 दलित युवक छत से निचे कूद जाते है. जिसमे से एक 16 साल के नाबालिग की मौत हो जाती है. तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताते है.
पुलिसकर्मी ने ली दलित बच्चे की जान
जब समाज में समानता की बातें किताबों तक सीमित हो और ज़मीनी हक़ीक़त जातिवाद की ज़ंजीरों में जकड़ी हो, तो सवाल उठता है कि क्या हम वाकई 21वीं सदी में हैं? जी हाँ, जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो पीड़ित किसके पास जाए, मदद के लिए कहाँ जाए, न तो सरकार दलितों के लिए कुछ करती है और न ही सामाजिक संगठनों को दलितों के उत्थान से कोई सरोकार है. ऐसा ही एक मामला हरियाणा के हिसार से सामने आया है, जहाँ एक पुलिस अधिकारी ने पर आरोप है कि उसकी वजह से दलित युवक गणेश की मौत हुयी हैं.
पीड़ित परिवार का आरोप
दरअसल, पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब पुलिस पहुची तो नशे में धुत पुलिस ने दलित मृतक बच्चे को पिटा जिससे बचने के लिए वो छत की तरफ दौड़ा और पुलिस भी उसके पीछे छत पर गयी और छत पर भी उसके साथ मारपीट करने लगी और दलित युवक गणेश को छत से धक्का दे दिया. इतना ही नहीं पुलिस ने दलित महिलाओ के साथ भी मारपीट की और घर में लगे cctv और DVR भी निकल ले गयी. पीड़ित परिवार का कहना है पुलिस सुबूत मिटने की कोशिश कर रही है. वही सोशल मीडिया पर इस घटना के एक विडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है.
हरियाणा के हिसार ज़िले के भारत नगर में 16 वर्षीय गणेश वाल्मीकि के जन्मदिन की खुशी मातम में बदल गई। परिवार म्यूज़िक बजाकर जन्मदिन मना रहा था — यह किसी भी इंसान का मौलिक अधिकार है।
लेकिन शराब के नशे में धुत पुलिसकर्मी जबरन म्यूज़िक बंद करवाने आए, जातिसूचक गालियाँ दीं, कुछ और पुलिस… pic.twitter.com/VOEqqN6Dy2
— Chandra Shekhar Aazad (@BhimArmyChief) July 10, 2025
2 पुलिसकर्मी भी घायल
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकरी के अनुसार इस पथराव में चौकी इंचार्ज समेत 2 पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. चौकी इंचार्ज विनोद ने बताया कि शुभम नाम के युवक के जन्मदिन पर वे तेज आवाज में डीजे बजा रहे थे. जब वह उन्हें रोकने गए तो उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया गया और बंधक बना लिया गया. जब उन्होंने उनके चंगुल से भागने की कोशिश की तो 2 लड़के छत पर चढ़ गए और उन पर पथराव कर दिया. जब पुलिस उन्हें पकड़ने गई तो वे छत से कूद गए और घायल हो गए. जिसके बाद गणेश नाम के लड़के की मौत हो गई. आकाश को अग्रोहा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है.
पीड़ित परिवार नहीं किया बच्चे का अंतिम संस्कार
गुस्साए पीड़ित परिजनों ने सिविल अस्पताल के शवगृह के सामने डीसी (DC) और एसपी (SP) के खिलाफ नारेबाजी की वही घरवालों ने अभी तक बच्चे का अंतिम संस्कार नहीं किया है. वे आरोपी पुलिसकर्नियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. भीम आर्मी चीफ चन्द्रशेखर आजाद ने भी हरियाणा सरकार से इस मामले में जल्द से जल्द पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है. जरा सोचिए. एक ओर दलित समाज के क्रूर मनुवादी दबंगों से निपट रहे हैं. दूसरी ओर मुस्लिम समाज के लोग भी अब उन पर हमला करने लगे हैं.
अब पुलिसवालों ने भी उनकी रक्षा के बजाए उनका दमन करना शुरु कर दिया है. ऐसे मे दलित जाएं तो जाएं कहां. पुलिस वालों में इतनी हिम्मत कैसे आ गई कि उन्होंने दलित बच्चे को छत से उठाकर फेंक दिया. जिस पुलिस का काम है गलत करने पर लोगों पर कार्रवाई करना, वह जज कब से बन गई और फैसला कब से सुनाने लगी. कोर्ट का काम पुलिस वाले कब से करने लगे. ये ऐसे सवाल हैं, जिसका जवाब किसी के पास नहीं है.



