Jharkhand news: हाल ही में झारखंड (Jharkhand) के गढ़वा (Garhwa) से हैरान और परेशान करने वाली खबर सामने आई है, जहां एक आदिवासी दलित महिला को अपने साथ होने वाले उत्पीड़न के लिए राज्यपाल (Governor) और सीएम (CM) से गुहार लगानी पड़ रही है, क्योंकि पीड़ित महिला को सुनवाई को उच्च अधिकारी और पुलिस नहीं सुन रहे है।
आदिवासी दलित शिक्षिका के साथ उत्पीड़न
ऐसा लगता है जैसे भारत अभी भी आजाद नहीं हुआ है और आज भी उन्हीं बंधनों में बंधा हुआ है, जैसे वर्षों पहले था। जी हाँ आज भी दलितों को अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। आज भी यदि दलित समुदाय का कोई व्यक्ति किसी ऊंचे पद पर आसीन होता है तो मनुवादियों की आंखों में खटकता है। ऐसा ही एक मामला फिर झारखण्ड के गढ़वा (Garhwa) के कांडी (Kandi) में देखने को मिला है। जहाँ एक दलित महिला शिक्षिका के साथ भेदभाव किया गया हैं।
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स्कूल से निकालने के लिए प्रताड़ित
दरअसल पोस्ट ग्रैजुएट (Post Graduate) ट्रेंड भाषा शिक्षिका सह जमा दो उवि कांडी की पूर्व एचएम विद्यानी बाखला ने राज्यपाल (Governor) और सीएम (CM) को एक अर्जी दी है जिसमें उन्होंने बताया कि उनके स्कूल के कुछ टीचर उन्हें स्कूल से निकालने के लिए प्रताड़ित कर रहे हैं, हद तो तब हो गई जब विद्यानी बाखला के अपने पैसे को ही रिश्वत का पैसा बताकर एसीबी (Anti-Corruption Bureau) से गिरफ्तार करा दिया गया। जबकि रिश्वत लेने में कई दूसरे टीचर शामिल हैं लेकिन उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया ।
सीएम हेमंत सोरेन से लगाई न्याय की गुहार
वही उच्च अधिकारियों की अनदेखी से तंग आकर दलित शिक्षिका (Dalit teacher) ने भवनाथपुर विधानसभा (Bhawanathpur Assembly Constituency) क्षेत्र के MLA अनंत प्रताप देव, MLA कल्पना सोरेन, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन (CM Hemant Soren) और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार (Governor Santosh Kumar Gangwar) को अपनी अर्जी देकर न्याय की गुहार लगाई है। हालांकि अभी तक इस अर्जी को लेकर सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
वही एक बार इस घटना ने एक बार फिर सरकार की सुरक्षा पर सवाल उठाये है आखिर कब दलित समुदाय को समाज में बराबरी के हक़ मिलेगा? या दलितों के साथ इसी तरह कि घटनाए सामने आती रहेगी।



