Jharkhand: सिस्टम की बदहाली ने ली गर्भवती की जान, 1 KM तक बहंगी पर ढोया पर नहीं बची दलित महिला की सांसें

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Pregnant Woman Death Jharkhand: हाल ही में झारखंड के गुमला से दिल झकझोर देने वली खबर सामने आई हैं। जहाँ एक दलित आदिवासी Pregnant महिला को समय पर अस्पताल जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिल पाई  जिस कारण उसे स्थनीय लोगो ने बहंगी पर ढोया लेकिन बीच रस्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया और उसकी मृत्यु हो गयी। इसका एक विडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा हैं।

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आदिवासी गर्भवती महिला की तड़पकर मौत

आज दलितों की स्थिति इतनी दयनीय हो गयी हैं कि उन्हें सरकारी मूलभूत सुविधा भी सही से नहीं मिल पा रही हैं। कई राज्य ऐसे है जहाँ दलित, आदिवासी समुदाय के लोगो जीने के लिए काफी संघर्ष करना पद रहा है। जी हाँ ऐसा ही कुछ झारखंड के गुमला में देखने को मिला। जहां प्रशासन की लापरवाही से न केवल आदिवासी समाज की एक गर्भवती महिला की तड़पकर मौत हो गई बल्कि उसके गर्भ में मौजूद शिशु की भी जान चली गई। दरअसल सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दिल को झकझोर कर देने वाला मंजर नजर आ रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विडियो

दरअसल ये वीडियो गुमला जिले के घाघरा प्रखंड के झलकाबाट गांव का है, जहां बहंगी में कुछ लोग एक गर्भवति महिला सुकरी कुमारी को बिठा कर ले जा रहे है, गांव की स्थिति ऐसी है कि वहां मूलभूत सुविधा तक नहीं है, और न ही एंबुलेंस पहुंचने के लिए रास्ते बने है, मजबूरी में आदिवासी समाज के लोग बहंगी में टांग कर ले जाने को मजबूर है।

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सरकार और प्रशासन की लापरवाही 

आपको बता दें, इस गांव में आदिम जनजाति के लोग रहते है। सरकार और प्रशासन की लापरवाही ऐसी है कि यहां तक सरकार के अधिकारी तक नहीं पहुंचते है। न तो मूलभूत सुविधायें यहां मौजूद है, विकास की स्थिति ऐसी है कि मरीजो को करीब 1 किलोमीटर तक पैदल या फिर बहंगी के सहारे चल कर लाया जाता है। तब जाकर स्वास्थ्य केंद्र तक आते है। गुमला का ये इलाका पूरी तरह से जंगली और पहाड़ी है, जिसके कारण पूरे गांव की अनदेखी की जाती है। महिला की मौत ने सरकार के विकास के सारे दावों की मिट्टी पलीत कर दी है। लेकिन हैरानी की बात है कि अभी तक पीड़ित परिवार की सुध लेने के लिए कोई नहीं आया है।

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