JNU latest news Update: देश की राजधानी दिल्ली की वैचारिक धड़कन माना जाने वाला संस्थान JNU आज फिर संघर्ष की चौखट पर खड़ा है। कैंपस की दीवारें आज फिर उन नारों से गूंज उठीं, जो सिर्फ हक नहीं, बल्कि सम्मान की मांग कर रहे थे। छात्रसंघ JNUSU ने जब शिक्षा मंत्रालय की ओर ‘लॉन्ग मार्च’ के लिए कदम बढ़ाए, तो उनके हाथों में सिर्फ पोस्टर नहीं, बल्कि रोहित वेमुला (Rohit Vemula) जैसे हजारों छात्रों के अधूरे सपनों की सिसकियां थीं। शिक्षा के मंदिरों में बढ़ते भेदभाव और UGC के नए नियमों की बेड़ियों के खिलाफ यह मार्च महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन आंखों की नमी का जवाब था जो बरसों से बराबरी का इंतजार कर रही हैं। दिल्ली की सर्द हवाओं और पुलिस के सख्त पहरों के बीच, ये छात्र अपने भविष्य की सलामती के लिए सड़कों पर उतरे थे।
मार्च के दौरान बिगड़ा माहौल
छात्रों के इस शांत मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस, RAF और CRPF की भारी घेराबंदी की गई। देखते ही देखते कैंपस की हवाओं में नारों की जगह खींचतान और चीखों ने ले ली। भारी धक्का-मुक्की और झड़प के बीच पुलिस ने JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा सहित 50 से ज्यादा छात्रों को हिरासत में ले लिया। घटना के जो वीडियो सामने आए हैं, वे सड़कों पर गिरे छात्रों के पोस्टरों और पुलिस की सख्त कार्रवाई की गवाही दे रहे हैं।
वीडियो में दिखा हंगामा और पुलिस के आरोप
जहां एक ओर छात्र बर्बरता का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वायरल वीडियो पुलिस के दावों को मज़बूती दे रहे हैं। इन वीडियो में कुछ छात्र सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और तीखी बहस करते नजर आ रहे हैं। एक वायरल क्लिप में पीएचडी छात्र नीतीश विश्वविद्यालय की दीवार पर चढ़कर भीड़ को उकसाते दिख रहा है, तो वहीं एक अन्य वीडियो में श्रेय नाम का छात्र कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी को थप्पड़ मारते हुए कैमरे में कैद हुआ है। सुरक्षा बलों पर डंडे फेंकने और उनके साथ बदसलूकी की इन तस्वीरों के आधार पर दिल्ली पुलिस अब उपद्रवियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई की तैयारी में जुटी है।
और पढ़े: BNS Section 314: दूसरे की संपत्ति का निजी इस्तेमाल अब पड़ेगा भारी, जानें सजा के प्रावधान
क्या था विरोध का कारण
26 फरवरी को छात्रसंघ ने कुलपति पर कथित जातिवादी टिप्पणियों, विश्वविद्यालय के फंड में कटौती, छात्रसंघ पदाधिकारियों के निष्कासन और रोहित एक्ट लागू करने की मांग को लेकर मार्च बुलाया था। छात्रों का आरोप है कि प्रदर्शन रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिसमें कई छात्र घायल हुए। छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति, सचिव गोपिका, महासचिव दानिश और एआईएसए की अध्यक्ष नेहा समेत 50 छात्रों को करीब 14 घंटे तक हिरासत में रखा गया। वहीं पुलिस ने 14 छात्रों को गिरफ्तार भी किया।
कैंपस के बाहर बैरिकेडिंग
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कैंपस के बाहर कई लेयर में बैरिकेड लगाए गए और छात्रों को बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई। जब छात्रों ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की बढ़ गई, जिससे विवाद और गहरा गया।
पुलिसकर्मी भी हुए घायल
इस दौरान कुछ महिला छात्रों पर बल प्रयोग के आरोप लगे, वहीं कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए। पुलिस का कहना है कि प्रशासन ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि कैंपस के बाहर मार्च की अनुमति नहीं है, लेकिन इसके बावजूद 400–500 छात्र इकट्ठा होकर आगे बढ़ने लगे, जिसके बाद कार्रवाई करनी पड़ी। कुल मिलाकर JNU में हुआ यह प्रदर्शन एक बार फिर छात्र राजनीति और प्रशासन के बीच टकराव को उजागर करता है। मामले को लेकर जांच जारी है और वीडियो के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं अदालत के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि लोकतंत्र में विरोध की आवाज को सलाखों के पीछे दबाया नहीं जा सकता। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन छात्रों की ‘रोहित वेमुला एक्ट’ की मांग पर कोई ठोस कदम उठाता है।



