JNU छात्र के वायरल वीडियो से हड़कंप, कहा – “मेरी मौत के जिम्मेदार ये होंगे…” जानें क्या है पूरी सच्चाई

JNU Violence
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Jawaharlal Nehru University: आमतौर पर वामपंथी विचारधारा को सामाजिक सुधारों, प्रगतिशीलता और रूढ़िवादी परंपराओं के विरोध के समर्थक के रूप में देखा जाता है। ऐसे में यह एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि जो समूह समाज को कुरीतियों से मुक्त करने का दावा करते हैं, वे खुद उसी हिंसा और अराजकता का हिस्सा कैसे बन जाते हैं जिससे समाज को बचाने की जरूरत है?

यदि तर्क-वितर्क और सुधार का नेतृत्व करने वाले संगठन ही हिंसक वारदातों में शामिल पाए जाएंगे, तो एक आम नागरिक से लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पालन की उम्मीद कैसे की जा सकती है? यह दोहरापन न केवल उन संगठनों की साख पर सवाल उठाता है, बल्कि छात्र राजनीति के गिरते स्तर को भी दर्शाता है। आप सोचेंगे हम समाज सुधारकों की बात क्यों कर रहे है तो चलिए इस लेख के जरिए बताते है कि मामला क्या है?

छात्र ने लगाया गंभीर आरोप

दरअसल, दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में रविवार देर रात जो हुआ, उसने इन सभी सवालों को फिर से चर्चा में ला दिया है। बता दें कि बीती रात छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प हो गई, जिसके बाद कैंपस में तनाव का माहौल बन गया। घटना के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें छात्रों के बीच मारपीट, पत्थरबाजी और अफरा-तफरी दिखाई दे रही है।

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि बायोटेक्नोलॉजी के छात्र प्रतीक भारद्वाज ने एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि कुछ वामपंथी छात्र उन्हें घेरकर धमका रहे थे। उनका कहना है कि वह डर के कारण वॉशरूम में छिपे हुए थे और बाहर करीब 50 लोगों की भीड़ मौजूद थी, जिसने दरवाजा तोड़ने की कोशिश की।

प्रतीक ने आरोप लगाया कि उनके ऊपर फायर एक्सटिंग्विशर खोल दिया गया, जिससे उन्हें सांस लेने में दिक्कत हुई और हालत बिगड़ गई। वीडियो में उन्होंने कहा कि अगर उनके साथ कुछ होता है तो इसके लिए गार्ड, पुलिस और वामपंथी संगठन जिम्मेदार होंगे। बताया गया कि आसपास मौजूद छात्रों ने उन्हें बाहर निकाला और एंबुलेंस बुलाने की मांग की।

वीडियो में क्या दिखा

घटना से जुड़े वीडियो में हॉस्टल की सीढ़ियों पर छात्र मुंह ढककर भागते दिखाई देते हैं। कुछ छात्रों के हाथों में डंडे, बर्तन और पत्थर नजर आते हैं, जबकि कई लोग मोबाइल से घटना की रिकॉर्डिंग करते दिखते हैं। एक वीडियो में पत्थरबाजी होती दिखाई देती है और एक छात्र पत्थर फेंकने वालों पर आरोप लगाते हुए वीडियो बनाता नजर आता है। वहीं एक छात्रा भी भागती हुई दिखाई देती है, जिस पर पत्थर फेंकने का आरोप लगाया गया है।

कुछ ऑडियो में एक छात्रा हमलावरों को चुनौती देती हुई भी सुनाई देती है। आरोप यह भी लगाए गए कि झड़प के दौरान छात्राओं पर हमला किया गया और उनके मोबाइल फोन छीने गए। एक अन्य वीडियो में छात्र यह आरोप लगाते दिखे कि झड़प के दौरान सिक्योरिटी गार्ड मौजूद होने के बावजूद उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया और हमलावरों को रोकने की कोशिश नहीं की।

ABVP का आरोप

घायल छात्र और कुछ छात्र संगठनों ने आरोप लगाया कि वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े लोग लाठी, पत्थर और कथित हथियार लेकर पहुंचे और आम छात्रों तथा ABVP कार्यकर्ताओं पर हमला किया। घटना के दौरान SOS संदेश भी साझा किए गए, जिनमें दावा किया गया कि रात करीब 1:30 बजे 500-600 लोगों की भीड़ ने छात्रों को घेर लिया और पुलिस को तुरंत बुलाने की अपील की गई।

मारपीट की वजह क्या बताई जा रही

बताया जा रहा है कि कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित के कथित बयान को लेकर पहले से कैंपस में तनाव था। छात्र संघ ने समता जुलूस निकालकर कुलगुरु से इस्तीफे और जवाबदेही की मांग की थी, जबकि निष्कासित पदाधिकारियों का धरना भी जारी था। छात्र नेताओं का आरोप है कि यूजीसी के इक्विटी रेगुलेशन को लेकर कुलगुरु की एक टिप्पणी से विवाद बढ़ा। इसी बीच आरोप है कि कुछ छात्र संगठनों ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज परिसर में ताला लगाने की कोशिश की, जिसका पढ़ाई कर रहे छात्रों ने विरोध किया। इसके बाद बहस बढ़ी और मामला मारपीट, पत्थरबाजी और हिंसा में बदल गया।

फिर उठे कैंपस सुरक्षा पर सवाल

वीडियो सामने आने के बाद JNU में छात्र सुरक्षा, प्रशासन की भूमिका और कैंपस राजनीति को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल पूरे मामले में अलग-अलग छात्र संगठनों की ओर से आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। वहीं वामपंथी संगठनों का कहना है कि उन्हें उकसाया गया और हिंसा की शुरुआत उनकी तरफ से नहीं हुई थी। हकीकत क्या है, यह तो निष्पक्ष जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन वह भी तभी संभव है जब इसकी शिकायत की जाए।

पुलिस का कहना है कि उनके पास अब तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है। इससे तो यही आभास होता है कि शायद एक बड़े मुद्दे को दबाने के लिए यह सारी रणनीति बनाई गई। अगर ऐसा है, तो यह सीधे-सीधे कानून के साथ मजाक है। यह एक ऐसी खतरनाक मानसिकता को दर्शाता है कि जो जैसा चलता आ रहा था, वैसा ही चलेगा और अगर किसी ने बदलाव की कोशिश की तो अंजाम ऐसा ही होगा।

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