Kaushambi news: हाल ही में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कौशांबी से एक चौकाने वाली खबर सामने आई है। जहाँ एक दलित युवती को न्याय मिलने में 25 साल का वक़्त लग गया। इस घटना से सरकार के कड़े कानून और प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर दिया है।
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दलित युवती को 25 साल बाद मिला न्याय
ये बाबा साहब (Baba Saheb) का ही बनाया कानून है कि भले ही 100 अपराधी छूट जाये लेकिन एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए, लेकिन सवाल ये उठता है कि आखिर दोषी को सजा मिलने के लिए समय क्यों निर्धारित नहीं किया जाता। खासकर जब मामला किसी दलित से जुड़ा तो फिर सो पीढ़ी गुजर जाती है न्याय मिलने के इंतजार में। ऐसा ही एक खबर उत्तर प्रदेश से सामने आई है, जहां एक दुष्कर्म पीड़िता दलित युवती को न्याय के लिए 25 साल लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन 25 सालों बाद ही सही दलित पीड़िता के साथ न्याय हुआ।
दरअसल ये घटना 14 जनवरी साल 2000 की है। जब कौशांबी (Kaushambi)के सैनी थाना क्षेत्र (Saini Police Station area) के रहने वाले पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बेटी के साथ सिराथू नगर पंचायत (Sirathu Nagar Panchayat) के वार्ड नंबर-दो का रहने वाला शफीक अहमद ने दुष्कर्म किया है। इतना ही नहीं उसने पीड़िता को जातिसूचक शब्द कहकर भी अपमानित किया था।
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आरोपी को आजीवन कारावास की सजा
इस मामले में 25 सालों बाद फैसला आया औऱ विशेष अदालत के विशेष न्यायाधीश अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम (Scheduled Castes/Scheduled Tribes Act) अमित कुमार मालवीय ने शफीक अहमद को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (life imprisonment) की सजा सुनाई है और साथ ही 10 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया है। आपको बता दें, इस फैसले का श्रेय ऑपरेशन कनविक्शन (Operation Conviction) के तहत की गई प्रभावी कानूनी कार्यवाही को दिया जा रहा है, जो कौशांबी के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शुरू की गई एक पहल है।
हैरानी की बात है कि विशेष अदालत जल्द से जल्द फैसला करने के लिए गठित किए गए, लेकिन इस मामले में दलित पीड़िता को न्याय के लिए 25 सालों का लंबा इंतजार करना पड़ा, जो देश के लचर कानून व्यवस्था का जीता जागता उदाहरण है। इसके अलवा आपको बता दें, इससे फले भी ऐसी घटनाए सामने आई हैं। जब रेप पीड़िता को न्याय मिलने में सालो लगे है।



