Lucknow news: दलित पीएचडी छात्र के साथ अन्याय? लखनऊ BBAU ने अनुशासनहीनता के आरोप में किया निष्कासित

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Lucknow BBAU controversy: हाल ही में उत्तर प्रदेश के लखनऊ बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय से एक चौकाने वाली खबर सामने आई हैं। जहाँ एक दलित पीएचडी (PhD) छात्र ने कॉलेज के विश्वविद्यालय (University) प्रशासन पर आरोप लगाया है कि उसे झूठे अनुशासनहीनता के आरोप में फंसाया गया है और उसे कॉलेज से निकल दिया गया हैं।

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दलित पीएचडी छात्र के साथ अन्याय

हैरानी की बात है कि जब जातिगत भेदभाव की बात होती है तो कहा जाता है कि शिक्षा ही भेदभाव को खत्म करने की ताकत रखता है, लेकिन क्या हो जब शैक्षणिक संस्थानों में ही जातिगत भेदभाव की पराकाष्ठा हो…तो फिर कैसे दलित छात्रा पढ़ने की, आगे बढ़ने कि हिम्मत कर सकेंगे। वैसे तो बाबा साहब ने जातिगत भेदभाव से परे समानतापूर्ण समाज की कल्पना तो की थी, लेकिन मौजूदा स्थिति तो ऐसी हो गई है दलितों को आगे ही बढ़ने नहीं दिया जा रहा है।

जी हाँ, उत्तर प्रदेश के बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ (Babasaheb Bhimrao Ambedkar University) में एक दलित पीएचडी छात्र (Dalit PhD students) पर जूठा आरोप लगा कर उसे कॉलेज से बाहर करने का मामला सामने आया है।  जहां पीएचडी छात्र बसंत कन्नौजिया पर अनुशासनहीनता की झूठा आरोप लगा कर उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया, जबकि उनकी कसूर केवल इतना ही था उन्होंने दलित छात्रों की आवाज बन कर उनकी बातों को बेहद निर्भिकता से रखते थे।

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छात्र ने लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप

उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही कॉलेज का नाम बाबा साहब के नाम से है लेकिन इस कॉलेज में दलितों और वंचितों के लिए आवाज उठाना एक गुनाह जैसा है। दलित छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन, वाइस चांसलर (Vice Chancellor) और प्रॉक्टर ऑफिस (Proctor’s Office) के पास कनौजिया के खिलाफ कोई सबूत नहीं है लेकिन उन्होंने दलितों के लिए आवाज उठाई थी, जो कि मनुवादी मानसिकता वाले टीचर्स को नागवार गुजरा।

मामले की निष्पक्ष जांच की मांग 

उन्हें जानबूझ कर साजिश के तहत निष्कासित कर दिया गया। इन मुद्दे दलित संगठन ने बसंत कनौजिया के लिए इंसाफ की मांग करते हुए भारत सरकार एवं शिक्षा मंत्रालय (Government of India and Ministry of Education)  से मांग की है कि पीड़ित छात्र के निलंबन को तुरंत बर्खास्त किया जाये और इस मामले की निष्पक्ष जांच की जायें, ताकि कोई दलित छात्र मनुवादियों के भेंट न चढ़ें।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी दलित छात्रा के साथ ऐसी घटना हुई हो। इससे पहले भी बीएचयू (BHU) से ऐसी ही खबर सामने आई थी, जहाँ एक दलित छात्र के साथ भेदभाव किया गया था। वही ये सभी घटनाएं दर्शाती हैं कि आज भी मनुवादी दलितों को आगे बढ़ते हुए नहीं देख सकते।

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