Equality for Dalits: हाल ही में पटना में, HAM पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi) ने डॉ. भीमराव अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस (Dr. Bhimrao Ambedkar’s Mahaparinirvan Diwas) मनाने का आयोजन किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि बाबासाहेब की पूजा भगवान के समान होती है, और उन्होंने संविधान में दलितों और वंचितों के लिए जो प्रावधान किए हैं, उनके आधार पर सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए।
दलितों और वंचितों को मिले निर्धारित समान अधिकार
बीते 6 दिसम्बर को भारत के सविंधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस दिन देश के कई बड़े नेताओ और राजनितिक पार्टियों ने उनके सामान में कई बड़े कार्यक्रम भी किया। वही बिहार के पटना में HAM पार्टी के संरक्षक जीतन राम मांझी ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर बयान दिया कि भारतीय संविधान में दलितों और वंचितों के लिए निर्धारित समान अधिकारों को सही तरीके से लागू किया जाना चाहिए। बता दें ऐसा पहली बार नहीं है जब जीतन राम मांझी ने दलितों के हक़ की मांग की हैं. वह अक्सर दलितों के हक़ और अधिकार की मांग करते रहते हैं।
सभी वर्गों के लिए समानता का अधिकार
इसका उद्देश्य सभी को समानता प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि संविधान के निर्माताओं ने सभी वर्गों के लिए समानता का अधिकार सुनिश्चित किया है, लेकिन इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता है। इतना ही नहीं मांझी ने बाबा साहेब को भगवान के समान मानते हुए यह कहा कि संविधान में निहित दलितों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए और उन्हें पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने आगे बराबरी के अधिकार का उल्लेख करते हुए उन्होंने संविधान में दिए गए मूल अधिकारों, विशेष रूप से बराबरी के अधिकार (आर्टिकल 14-18) और अन्य सुरक्षा उपायों का उल्लेख किया, जो दलितों और जरूरतमंदों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करते हैं। साथ ही उन्होंने ये भी कहा आज के समय में दलितों को उच्च शिक्षा मिलने के बाद भी उन्हें समाज में बरबरी का अधिकार नहीं मिलता हैं, वो आज के भारत में भी घुट कर ही जी रहे हैं। इसके अलवा उन्होंने बाबा साहेब के द्वारा अपनाए गए बौद्ध धर्म के बारे भी कहा वह देश का एक इकलौता ऐसा है धर्म है जो धर्मनिरपेक्ष हैं जहाँ समनाता का अधिकार हैं।



