Meerut murder case: 8 जनवरी से उत्तर प्रदेश का मेरठ शहर खबरों की सुर्खियों में है, न केवल तमाम न्यूज चैनलों की नजर यहां है बल्कि कई बड़ी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं की नजरें भी यहां टीकी है… मसला एक ही है, एक दलित महिला की निर्मम हत्या और फिर जातिवादी दबंगो द्वारा उसका अपहरण। 8 जनवरी की सुबह 8 बजे दलित समाज से आने वाली सुनीता रोज की तरह खेतों पर जाने के लिए घर से निकली थी, लेकिन तब शायद उन्हें भी नहीं पता था कि एक मौत का साया उनके पीछे है.. वो फिर कभी अपने परिवार और बच्चों को नहीं देख पायेगी.. अपनी बेटी को बचाने के लिए सारी कोशिशें नाकाम हो गई.. 3 दिन तक बेटी गायब रही.. मां की मौत हो गई लेकिन बदनसीब बेटी को अंतिम बार अपनी मां का चेहरा तक देखना नसीब न हुआ।
जातिवादियों के हाथों तबाह
इस मां का, इस बेटी का एक ही आरोपी था पारस राज… आज बेटी की चीखे, उसका रोना किसी का भी कलेजा कंपा दें, जिसे केवल अपनी मां को बचा न पाने का गम नहीं है बल्कि काश पुलिस पहले खोज पाती तो अंतिम बार मां का चेहरा देख पाती इसका भी मलाल है। मेरठ का कपसाढ़ गांव मातम से सायें में है..सुनीता का हंसता खेलता परिवार जातिवादियों के हाथों तबाह हो गया… 20 साल की रूबी पर इस वक्त कई तरह के लांछन लग रहे है, लेकिन एलएलआरएम (LLRM) मेडिकल कॉलेज स्थित आशा ज्योति केंद्र में जो दृष्य नजर आया वो सच की कहानी को ही बदल देता है।
रूबी को बरामद करके आशा ज्योति केंद्र में रखा गया, जहां उसकी काउंसलिंग की गई, पुलिस की निगरानी में थी, लेकिन जिद थी कि पिता के पास जाना है, परिवार से मिलना है, औऱ जब परिवार से मिली तो पिता सतेंद्र, भाई नरसी व शिवम और तहेरी बहन सर्वेश को देखकर उसके सब्र का बांध टूट गया, वो पिता से लिपट कर रोती रही..रूबी ने उस दर्दनाक सुबह की सारी कहानी शब्द ब शब्द बताई-
क्या बोली रूबी अपने बयानों में
रूबी ने अपने परिवार के सामने उस दिन की घटना को शब्द ब शब्द बताया… रूबी ने कहा कि वो मां के साथ नहीं निकली थी, बल्कि दो सहेलियों के साथ गन्ना ले कर अपने पिता से मिलने जा रही थी, वहीं उसकी मां पीछे पीछे चल रही थी। लेकिन रजवाहे के पास गन्ने के खेत में पारस छिपा हुआ था और फरसा लेकर रूबी के सामने आ गया, और उसका हाथ जबरन पकड़ कर उसे खेतों की तरफ ले जाने लगा। पारस को देख कर रूबी के दोनो दोस्त डर कर भाग गए, वहीं पीछे से आ रही उसकी मां ने पारस को रोकने की कोशिश की, लेकिन पारस ने उसकी मां पर हमला कर दिया।
पारस के पास फरसा के अलावा तमंचा भी थी। पारस ने सुनीता पर कई हमले किये थे, जब सुनीता जमीन पर गिर गई तो वो रूबी को घसीट कर गन्ने की खेतों की तरफ ले गया। रूबी ने पारस के चंगुल से भागने की भी कोशिश की थी लेकिन वो राजवाहे में गिर पड़ी तो पारस भी पीछे से कूद पड़ा, उसने रूबी को धमकी दी कि अगर उसने शोर मचाया तो वो उसके साथ साथ पूरे परिवार को जान से मार देगा।
तमंचे के दम पर अपहरण किया
उसने शोर शराबा सुनकर करीब डेढ़ घंटे तक ठेके के पीछे गन्ने के खेत में उसे तमंचा दिखा कर बिठाये रखा था। और फिर उसे गंगनहर पटरी तक ले गया। डर और सदमे से रूबी के मुंह से एक आवाज नहीं निकली थी, पारस ने तमंचे के दम पर एक ट्रक रुकवाया और उसे जबरन पहले खतौली, फिर दिल्ली ले गया। पारस उस दौरान चादर ओढे हुए था और तमंचा उसके हांथो में ही था। दिल्ली से फिर उसे वारिस खतौली ले गया जहां से उसे हरिद्वारा ले जाने की तैयारी करने लगा.. लेकिन रूबी जिद पर अड़ गई कि उसे अपने घर वालो से बात करनी है, नहीं तो टस से मस नहीं होगी।
पारस ने किसी अपने रिश्तेदार से बात करवाई थी, और उसे हरिद्वार ले कर गया था। लेकिन पुलिस ने इस जगह चौकन्ना होकर पारस की लोकेशन का पता लगा लिया और रूबी को भी पारस के साथ बरामद कर लिया। रूबी ने बताया कि पारस ज्यादातर उसे स्टेशन पर ही लेकर घूमता रहा था। रूबी ने किसी भी दवाब को मानने से इंकार करते हुए स्वीकार किया कि पारस ने उसका तमंचे के बल पर अपहरण किया।
पारस 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर
उसकी मां की हत्या की, और उसे 60 घंटे तक बंधक बना कर रखा। रूबी ने ये भी बताया कि पारस घटना के समय अकेला था, उसने कार से उसका अपहरण नहीं किया था। रूबी ने उस, फरसे का भी चित्र बनाया जिससे उसकी मां की हत्या की गई थी, हालांकि रूबी को अभी भी ये नहीं पता कि वो फरसा पारस ने कहां छिपाया है। वहीं रूबी के बयान से इस मामले में गिरफ्तार किये गए एक और संदिग्ध सुनील को लेकर जांच के बाद उसे रिहा करने की उम्मीद है।
रूबी के बयान के ये मामला काफी हद तक साफ हो गया है, वहीं पारस 14 दिनों की पुलिस रिमांड पर है। रूबी कड़ी सुरक्षा के बीच अपने परिवार के पास आ गई है, वहीं उसके बयान के बाद पारस का झूठ भी साफ हो चुका है। अब ऐसे में देखना ये होगा कि पुलिस जांच में और कौन से नए पन्नों को खोलती है, और पारस को कानून क्या सजा देगा।



