MP Dalit Urine Case: आरोपियों को जमानत नहीं, कोर्ट ने न्यायिक हिरासत बरकरार रखी जेल में रहेंगे आरोपी

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MP Dalit Urine Case: हाल ही में मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के भिंड (Bhind) में एक दलित युवक के साथ मारपीट करने और उसे जबरन पेशाब पिलाने के मामले को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। जहाँ कोर्ट ने इस मामले को लेकर कड़ा रुख अपनाया है दलित युवक को पेशाब पिलाने के मामले में कोर्ट ने जमानत अर्जी खारिज कर दी हैं। कहा कि आरोपी अब जेल में ही सजा काटेंगे।

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कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका

पिछले कुछ समय से मध्य प्रदेश के भिंड का एक मामला सुर्खियों में है, जहां एक दलित युवक  ज्ञानसिंह जाटव की पिटाई की गई और उसे पेशाब पीने के लिए मजबूर किया गया। अब उसी मामले को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल दलित के साथ हुई बर्बरता को लेकर सवर्ण और दलित के आमने सामने आने के बाद भी कोर्ट के रुख ने बता दिया कि जो दोषी है, उसे सजा भुगतनी पड़ेगी। तमाम विवादों के बीच Madhya Pradesh High Court की ग्वालियर (Gwalior) बेंच ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है।

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आरोपियों के खिलाफ एसटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज

बता दे तीनों आरोपियों ने इससे पहले भी भिंड जिला कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी लेकिन वहां भी याचिका खारिज कर दी गई थी। तीनों आरोपियों ने पीड़ित के साथ अमानवीय व्यवहार करते हुए पहले उसके साथ मारपीट की थी और फिर जबरन उसे पेशाब पिला दिया था। जिसके कारण तीनों के खिलाफ मारपीट, अपहरण और एससी-एसटी एक्ट (SC-ST ACT) की धाराओं में मामला दर्ज है। वहीं वकील अनिल मिश्रा ने तीनों आरोपियों की पैरवी की थी।

काम करने से इनकार

बताते चले कि ये घटना 20 अक्टूबर 2025 को है जब भिंड जिले में दलित समाज से आने वाले ज्ञानसिंह जाटव को ड्राइवर का काम करने से इनकार करने पर सोनू बरुआ, आलोक शर्मा और छोटू ने पहले ग्वालियर से जबरन उठाया, फिर उसके साथ मारपीट की और जबरन पेशाब पिलाया था। वही मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार मीडिया से बातचीत में ज्ञानसिंह ने बताया कि ये लोग आपराधिक प्रवृत्ति के हैं, इसलिए उसने उनकी गाड़ी पर ड्राइविंग करने से मना कर दिया था। वही मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रुख ने कहीं न कहीं दलितों के मन में ये आस जगाई है कि दलित आज भी भारत की न्याय व्यवस्था का हिस्सा है।

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