Bihar CM: नीतीश कैबिनेट में OBC EBC और दलित का दबदबा सवर्ण को मिलीं इतनी सीटें, देखिए पूरी लिस्ट

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Nitish Kumar Cabinet Caste Data: बीते दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 27 मंत्रियों के साथ 10वीं बार सीएम पद की शपथ ली। वही नई कैबिनेट (2025) में जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखा गया है, जिसमें OBC/EBC और दलित समुदाय का अच्छा-खासा प्रतिनिधित्व है। तो चलिए इस लेख में जानते है की बिहार में नितीश सरकार में किस को कितनी सीट मिली है.

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नीतीश कैबिनेट में किस जाति के कितने सदस्य 

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) ने रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. नीतीश कुमार के साथ डिप्टी सीएम (Deputy CM) के रूप में सम्राट चौधरी (Samrat Chaudhary) और विजय सिन्हा समेत कुल 26 मंत्रियों ने भी शपथ ली..मंत्रिमंडल के गठन में जातीय समीकरण का पूरा ध्यान रखा गया. वही नीतीश कैबिनेट में किस जाति को कितना प्रतिनिधित्व मिला इस बार ये भी काफी दिलचस्प है.

पिछड़ा समुदाय से 5 लोगों को मंत्रिमंडल मिली जगह

नीतीश कैबिनेट (Nitish Cabinet) में कुल 4 राजपूत, 2 भूमिहार, 1 ब्राह्मण, 1 कायस्थ, 3 कुशवाहा, 2 कुर्मी, 2 वैश्य, 2 यादव, 1 मुसलमान, 2 मल्लाह, 5 दलित जिसमें संतोष सुमन (मुसहर), अशोक चौधरी (दलित), सुनील कुमार, और अन्य (जैसे पासी, रविदास) शामिल हैं और एक EBC समुदाय से सदस्य को मौका दिया गया है. बिहार के जाति सर्वे के मुताबिक राज्य में OBC समुदाय की आबादी लगभग 27 फीसदी है. नीतीश कैबिनेट में OBC समुदाय से 8 मंत्री बनाए गए हैं. राज्य में अति पिछड़ा समुदाय की आबादी लगभग 36 फीसदी है. अति पिछड़ा समुदाय से 5 लोगों को मंत्रिमंडल में जगह मिली है.

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अनुसूचित जाति समूह से मंत्रिमंडल में 5 चेहरे

इसके अलावा बिहार की लगभग 20 फीसदी जनसंख्या वाले अनुसूचित जाति समूह से मंत्रिमंडल में 5 चेहरों को मंत्री बनाया गया है…राज्य की लगभग 18 प्रतिशत आबादी वाले मुस्लिम समुदाय से पिछली बार की तरह इस बार भी नीतीश कैबिनेट में सिर्फ एक मंत्री को जगह मिली है. मंत्रिमंडल के ज़रिए NDA ने बिहार के जातीय और सामाजिक समीकरण को साधने की कवायद की है. अगड़ी जाति से लेकर पिछड़ी और अति-पिछड़ी जाति सहित अल्पसंख्यक समुदाय को भी प्रतिनिधित्व देने का काम किया गया है.

आपको बता दें, नई कैबिनेट के साथ सरकार ने साफ संकेत दिया है कि विकास, सामाजिक न्याय और राजनीतिक संतुलन उसके शासन की प्राथमिकताएं बनी रहेंगी। ताकि भविष्य में कोई समस्या आए तो उसका सही ढंग से निवारण किया जाए.

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