Shamli news: हाल ही में एक खबर सामने आई है जहाँ हिन्दू लड़की ने हिन्दू लड़के से लव मैरिज किया। लेकिन परिवार, समाज और SHO इस शादी का विरोध कर रहे हैं लड़की के परिवार का कहना है लड़की ब्राह्मण है और लड़का वाल्मीकि। इस कारण यह रिश्ता नही हो सकता हैं। वही इस घटना ने पुलिस प्रशासन से सवाल खड़े कर दिए है आखिर पीड़ित को न्याय कहा मिलेगा।
ब्राह्मण लड़की ने वाल्मीकि समुदाय के लड़के से लव मैरिज
दलितों को आज भी समाज में भेदभाव का सामना करना पड़ता है और यह भेदभाव स्कूलों और ऑफिसों सहित हर जगह साफ दिखता है। कभी-कभी यह भेदभाव इतना गंभीर हो जाता है कि दलितों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। कई मामलों में, दलित युवाओं ने इंटरकास्ट मैरिज की है जो मनुवादी सोच को मंज़ूर नहीं थी। ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के शामली (Shamli) से सामने आया है जहां एक ब्राह्मण लड़की ने वाल्मीकि समुदाय (Valmiki community) के लड़के से लव मैरिज कर ली, जिसके बाद गुस्साए परिवार वालों ने नजदीकी पुलिस स्टेशन में इस मामले की शिकायत दर्ज कराई। वही बताया कि ये रिश्ता नहीं हो सकता हैं।
SHO की भूमिका पर सवाल
जिसके बाद पुलिस ने पीड़ित दम्पति को सुरक्षा देने की बजाय ये कह दिया कि ये रिश्ता मान्य नहीं हैं। वही मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित दम्पति ने बताया कि एसएचओ (SHO) पहलार्द सिंह और गांव पंचायत के सरपंच राजकुमार पीड़ित दंपत्ति को काफी समय से जाति के नाम पर परेशान कर रहे हैं, जिसे सोशल मीडिया पर वायरल विडियो में साफ़ देखा जा सकता हैं। वही इस घटना के सामने आने के बाद अब ये देखना बाकि है कि कब इस मामले कार्यवाही होती हैं। आपको बता दें, इस घटना को लेकर एक बार फिर पुलिस प्रशासन कि सुरक्षा पर सवाल उठ गए हैं।
हर नागरिक को अपनी पसंद से शादी करने की आज़ादी
इसके अलवा आपको बता दें, भारत में, कानून हर नागरिक को अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने की आज़ादी देता है, चाहे उनकी जाति या धर्म कुछ भी हो। इसे लव मैरिज कहा जाता है और यह स्पेशल मैरिज एक्ट, 1954, या उससे जुड़े हिंदू मैरिज एक्ट के तहत पूरी तरह से कानूनी है। दूसरी तरफ, जाति (ब्राह्मण और वाल्मीकि) का अंतर इस शादी को गैर-कानूनी नहीं बनाता है। भारत के संविधान और हिंदू मैरिज एक्ट के तहत, दो हिंदू लोगों के बीच शादी पूरी तरह से कानूनी है। अगर लड़का और लड़की दोनों बालिग हैं (लड़की के लिए 18 साल और लड़के के लिए 21 साल), तो वे कानून की नज़र में अपनी शादी का फैसला करने के लिए आज़ाद हैं।



