Sonbhadra: पुलिसकर्मियों पर FIR कोर्ट के निर्देश पर तत्कालीन SHO समेत पाँच के खिलाफ दलित उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज।

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Sonbhadra news: हाल ही में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सोनभद्र (Sonbhadra) से चौकाने वाली खबर सामने आई है, जहां एक दलित महिला के साथ उत्पीड़न करने के मामले में विशेष न्यायाधीश ने एससी/एसटी एक्ट (SC-ST ACT) के तहत कोन थाना पुलिस (Kon Thana Police) को तत्कालीन थानाध्यक्ष सहित पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने का आदेश दिया है।

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दलित महिला के साथ मारपीट 

यह घटना सोनभद्र में तीन महीने पहले हुई, जब एक दलित महिला ने भूमि विवाद में हुई मारपीट  के समाधान के लिए स्थानीय थाने में अनुमति पत्र प्राप्त करने लेने गयी थी। लेकिन पुलिस ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और पीड़िता को अपेक्षित पत्र भी प्रदान नहीं किया। वही मामले की जांच कर रहे सीओ के मुताबित सोनभद्र  (Sonbhadra) के कोन थाना क्षेत्र के गोरसिंगा गांव (Gorsinga village) में अगस्त की सुबह करीब नौ बजे फुलवंती देवी ने तहरीर दी थी।

महिला की शिकायत दर्ज नहीं हुई 

गांव की जमीन विवाद को लेकर गांव के ही चंद्रावती देवीसंगीता देवीबेबी देवी समेत कई लोगो ने लाठी डंडो से उनपर और उनकी बेटी पर बेरहमी से हमला कर दिया था। लेकिन जब गंभीर हालात में दोनो मां बेटी अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने इलाज के पहले थाने से अनुमति लाने को कहा, लेकिन तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक (Inspector in charge) ने न तो मेडिकल देने की अनुमति दी थी और,न ही इस घटना के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की थी।

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पीड़िता ने लिया अदालत का सहारा

जिसके बाद सीओ (CO) ओबरा को अर्जी दी गई तब जाकर प्राथमिक उपचार (First aid) तो हुआ लेकिन मेडिकल जांच तब भी नहीं हुई, जिसके कारण पीड़िता को अदालत का सहारा लेना पड़ा। महिला का कहना था कि अब उसकी आस टूट गयी है। जिसके बाद कोर्ट (Court) ने इस मामले में सभी पांचो चंद्रावती देवी, संगीता देवी, बेबी देवी, सीताराम और तत्कालीन थाना इंचार्ज समेत 5 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज करके जांच शुरु करने के आदेश दिये है। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है, जिसमें पुलिस अधिक्षक की भूमिका पर बड़ा सवालियां निशान खड़ा हो गया है। वही मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के मुताबिक जांच के बाद ही आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्यवाई शुरु होगी।  
  

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