Dalit cook Tamil Nadu: हाल ही में तमिलनाडु (Tamil Nadu) के करूर (Karur), से इंसानियत को शर्मशार करने वाली खबर सामने आई हैं। जहाँ एक दलित महिला रसोइया द्वारा बनाया गया खाना बच्चों ने खाने से मना कर दिया। जिसके बाद दलित महिला रसोइया को स्कूल छोड़ने का आदेश दे दिया गया।
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स्कूल में दलित रसोइया से भेदभाव – Discrimination against Dalit cook at school
तमिलनाडु (Tamil Nadu) के करूर (Karur), से है, जहां एक सरकारी स्कूल में बच्चों के माता-पिता ने अपने बच्चों को स्कूल से निकालने का फैसला किया क्योंकि उस स्कूल में खाना बनाने वाली रसोइयां दलित है। ये घटना करूर जिले थोगमलाई यूनियन (Thogamali Union) के चिन्ना रेड्डीपट्टी (Chinna Reddypatti) की है। पीड़िता आर. निरोशा ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि 10 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री नाश्ता योजना’ (CMBS) के तहत उसे पंचायत यूनियन मिडिल स्कूल (Panchayat Union Middle School) में रसोइया के तौर पर नियुक्त किया गया था।
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पीड़िता को स्कूल छोड़ने का आदेश
लेकिन 16 सितंबर को बच्चों के मातापिता ने निरोशा के बारे में जातिसूचक अपशब्द कहे और बच्चों को भेजने से इंकार कर दिया, जिसके बाद स्कूल के प्रिंसीपल भानुमति ने पीड़िता को स्कूल छोड़ने का आदेश देते हुए कहा कि अभिभावक दलित रसोइया के हाथों का बना खाना अपने बच्चों को देने के लिए तैयार नहीं है। वहीं जब अगले दिन वो स्कूल ड्यूटी पर आई, तो उसकी जगह पर किसी और रसोइया को रख लिया गया। 18 दिसंबर को निरोशा ने थोगमलाई पुलिस स्टेशन (Thogamalai Police Station) में शिकायत भी दर्ज कराई थी लेकिन उस पर दवाब बनाया जा रहा है कि वो नौकरी छोड़ दे। इतना ही नहीं निरोशा का दावा है कि यह महिला ऊंची जाति के हिंदू समुदाय की है। इसके बाद उसने महालिर थिट्टम के ब्लॉक मिशन मैनेजर (BMM) से संपर्क किया, लेकिन उसे वही जवाब मिला जो हेडमिस्ट्रेस ने दिया था।
लेकिन अधिकारियों ने आरोपो को खारिज करते हुए फिर से नौकरी पर आने के लिए कहा है, लेकिन निरोशा ने अपना रोष व्यक्त करते हुए मांग की है कि उसके साथ जातिगत भेदभाव (Caste discrimination) करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाई होनी चाहिए, ताकि वो दुबारा जातिगत भेदभाव का शिकार न हो। हालांकि जिला कलेक्टर (District Collector) की तरफ से अभी तक इस मामले में कोई बयान नहीं आया है, लेकिन रसोइया के साथ जातिगत भेदभाव का ये मामला कोई नया नहीं है, ऐसे में निरोशा की मांग को लेकर क्या रूख अपनाता है प्रशासन ये देखने वाली बात होगी। इसके अलवा आपको बता दें, यह मामला भारतीय समाज में गहरे तक पैठी जातिगत जड़ों और स्कूलों में होने वाले भेदभाव को दर्शाता है।



