Top 5 Dalit news: चाहे कोई कितना भी शोर मचा लें, सरकार चाहे कितना भी सबके साथ सबके विकास की बात कर लें, लेकिन जब तक सरकार और न्याय पालिका एक साथ मिलकर पिछड़ो और दलितों के लिए कदम नहीं उठायेगी. तब तक उनकी उत्पीड़न नहीं रूकने वाला। कोर्ट के बनाये नियम सरकार नहीं मानती, सरकार के सुझाव कोर्ट.. लेकिन घुन बन कर पिसते हमेशा कमजोर और पिछड़े ही है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
एससी-एसटी में जल्द लागू हो सकता है क्रिमी लेयर
1, दलितो से जुड़ा पहला मामला राजधानी दिल्ली से है, जहां ओबीसी वर्ग की तरह की एससी एसटी वर्ग में भी क्रिमी लेयर लागू करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। दरअसल 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने कोटे के अंदर कोटा देने की मांग को स्वीकार कर लिया था, जिसमें सभी राज्य सरकारों को ये शक्ति दी गई कि एससी-एसटी के आरक्षण को वर्गीकरण करके एससी एसटी लोगों के बीच समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया जा सकें,
जिसके लिए कोटा के भीतर कोटा बनाने की मंजूरी दी गई थी और क्रिमी लेयर लागू करने की मांग पर केंद्र सरकार को विचार करने के लिए समय दिया था, लेकिन इतने समय के बाद भी सरकार की तरफ से कोई जवाब मिलने की सूरत में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल जवाब किया। उन्होंने एससीएसटी (SC/ST वर्ग के लिए भी क्रिमी लेयर की बढ़ती मांग को लेकर केंद्र औऱ राज्य सरकार दोनो को निर्देश दिये है कि वो उन मानदंडो को तैयार करें जिससे ये तय हो सकें कि किसे क्रिमी लेयर में रखना है, किसे नहीं। साथ ही ये भी कहा कि वो एक समय सीमा तय कर के बतायें ताकि जल्द से जल्द अधिक पिछड़े उप-समूहों को प्राथमिकता और फायदा हो सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार का जवाब आने तक मामले की सुनवाई टाल दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का रुख बता रहा है कि जल्द ही एससी एसटी वर्ग में भी क्रिमी लेय़र लागू हो सकता है। वहीं एससी एसटी वर्ग (SC/ST Category) के करीब 100 एनडीए सांसदों ने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर अपील की है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को किसी भी सूरत में लागू नही किया जाना चाहिए, नहीं तो वो आंदोलन करेंगे। वहीं बसपा सुप्रीमों ने भी इसका विरोध किया है। अब देखना ये होगा कि इस फैसले के बाद दलितों और पिछड़ो का क्या रूख होगा।
एटा में दलित बाराती पर हमला
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के एटा से है, जहां एक दलित की बारात रोकी गई और दूसरे बाराती के लोगो ने दलित बारात में घुसकर जमकर तोड़फोड़ मचाई। ये मामला एटा के सकीन थाना क्षेत्र के पीपल टोला मोहल्ले का है, जहां एक तरफ तिलक समारोह चल रहा था तभी वहीं पर दलित समुदाय की बारात भी आई..लेकिन डीजे पर कुछ डांस स्टेप्स को लेकर दोनो घरो के लोग आपस में भिड़ गए।
मामले को शांत कराने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा। चश्मदीदो के मुताबिक शाक्य समाज से आने वाले लोगो के यहां तिलक का प्रोग्राम था।वहां डीजे लगा था तभी वहां दूसरी बाराती के लोग आकर नाचने लगे, लेकिन ये बात शाक्य समाज केलोगो को रास नहीं आई और उन लोगो ने गाली गलौच शुरु कर दी.. इतना ही नहीं जातिसूचक शब्दों का भी इस्तेमाल किया, जिससे मामला और ज्यादा गर्मा गया और खुशी का माहौल मारपीट में तब्दील हो गया।
आनन फानन में पुलिस को बुलाया गया, जिसके बाद मामले को शांत करा कर पुलिस की निगरानी में ही शादी कराई गई। वहीं पुलिस ने जातिगत मुद्दा देखते हुए वीडियो जांच शुरु कर दी है, साथ ही लोगो से पूछताछ जारी है। पुलिस के मुताबिक ये मामला जातिगत अपमान का नहीं है, लेकिन फिर भी पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। तब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की जा सकती है।
भीम आर्मी चीफ की सरकार को खुली चुनौती
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूजीसी (UGC) के नए नियमो पर लगे स्टे को लेकर होने वाले विरोध प्रदर्शन को लेकर है। पिछड़ो और बहुजन छात्रो को आंदोलन करने के बजाये पढ़ाई पर ध्यान की बात करने वाले भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने खुद हल्ला बोल दिया है। उन्होंने बहुजन छात्रो से किया अपना वादा निभाते हुए दिल्ली के जंतर मंचर के बाहर प्रदर्शन शुरु कर दिया है। इतना ही नहीं उन्होंने पूरी मीडिया के सामने चैलेंज करते हुए कहा कि जो लोग जिस भी पार्टी का प्रतिनिधित्व लोकसभा में कर रहे है, उस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष UGC के मुद्दे पर आजाद से डिबेट कर सकता है।
उन्होंने कहा कि दलितो और पिछड़ो की हालात केवल वहीं समझ सकते है जो उनके बीच से है। अगर किसी में हिम्मत है तो आये और हमसे डिबेट करें। उन्होंने मांग की है कि जब तक दुबारा से यूजीसी की गाइडलाइन लागू नहीं हो जाती है तब तक ये आंदोलन जारी रहेगा। बता दें कि यूजीसी ने जातिगत उत्पीड़न रोकने के लिए नई गाइडलाइन लागू की थी लेकिन इसे सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया।
जिसपर सरकार के किसी भी प्रतिनीधि की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, जिसे लेकर बहुजन समाज के लोगो में काफी रोष है। वहीं यूपी में बहुजन छात्रों के साथ पुलिस के रवैये से ये आंदोलन और ज्यादा उग्र होता जा रहा है, ऐसे में देखना ये होगा कि क्या आजाद की चैलेंज स्वीकार करने के लिए कोई राजी होने की हिम्मत दिखा पायेगा। आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।
चित्रकूट में दलित बुजुर्ग की हत्या
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के चित्रकूट (Chitrakoot) से है, जहां एक दलित युवक की पीट पीट कर हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने बिजली का केबल जोड़ने की कोशिश की थी। ये घटना चित्रकूट के रैपुरा क्षेत्र के लोढ़ियामाफी गांव का है। मृतक कोटेदान सुखनंदन के बेटे ने तीन लोगो के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए बताया कि गांव में पिछले एक हफ्ते पहले ट्रांसफारमर फुक गया था तो गांव वालो चंदा इकट्ठा करके पास के ही ट्रांसफारमर से कनेक्शन लेने के लिए चंदा इक्ट्ठा किया था
, लेकिन सबका कनेक्शन लग गया मगर अनूसूचित होने के कारण उनका कनेक्शन लगाने से इंकार कर दिया गया। जिससे सुखनंदन का विवाद हो गया, विवाद बढ़ता गया और गांव के ही अमित अनूप और जीवनलाल खंगार ने सुखनंदन को बुरी तरह से पीटा, जब बहू राजवंती बचाने पहुंची तो उसे भी पीटा गया। लेकिन दोपहर को उसने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
पुलिस ने तीनो आरोपियो के खिलाफ मामला दर्ज कर जीवनलाल को गिरफ्तार कर लिया और बाकियों की तलाश जारी है। वहीं पुलिस के मुताबित जीवनलाल ने अवैध तरीके से तार लगाने की कोशिश की थी, लेकिन सुखनंदन ने उसे रोक था, इसी गुस्से में उसे इतनी बुरी तरह से पीटा गया था। फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच में लगी है।
बस्ती जिले में दलित छात्रायें उतरी सड़क पर
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के बस्ती जिले से है, जहां महिला महाविद्यालय की दलित छात्राओं ने प्राचार्य के खिलाफ जातिगत उत्पीड़न के मामले में सीधा डीएम ऑफिस के बाहर हल्ला बोल दिया है। दलित छात्राओं ने आपबीती बताते हुए कहा कि प्राचार्य सुनीता तिवारी ने जातिगत भेदभाव की हद पार कर दी है, वो छात्रो को अलग अलग नामों रे बुलाती है, उन्हे धमकी देती है कि उनकी कोई औकात नहीं है। अगर उनके खिलाफ गई तो वो उनका जीवन बर्बाद कर देंगी। छात्राओं ने इससे पहले भी कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की है।
लेकिन हर बार प्राचार्य अपनी बिमारी का बहाना बना कर छात्राओं को ब्लैकमेल करने की कोशिश करती रही है, लेकिन इस बार दलित छात्राओं ने प्राचार्य के खिलाफ हल्ला बोल दिया। छात्राओं ने बताया कि प्राचार्य के आदेश पर मेन गेट निकलवा दिया गया, वहां शराबी बैठे रहते है जो आते जाते लड़कियों को परेशान करते है, शिकायत करने पर उल्टा धमकी देती है कि मुंह बंद रखो नहीं तो पास नहीं होने देंगी।
छात्राओं ने एक सुर में मांग की है कि उन्हें ऐसी जातिगत भेदभाव करने वाली प्राचार्य नहीं चाहिए। या तो उनका तबादला हो या उन्हें निलंबित किया जायें। बता दें कि सुनीता तिवारी 2022 से महिला महाविद्यालय की प्रींसीपल है और तब से छात्राओं को ये भेदभाव झेलना पड़ रहा है। अब देखना ये होगा कि छात्राओं के आवाज बुलंद करने के बाद प्रशासन की तरफ से क्या कदम उठाया जाता है।



