Telangana news: दुनिया में नहीं बची इंसानियत जातिवाद की सारी हदे, पार मंदिर में प्रवेश मात्र से गंवा बैठे अपनी 2 महीने की बेटी की जान

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Telangana news:  यह कैसा समाज है जहां इंसानियत से ज्यादा ऊंच-नीच और जाति के नाम की दीवारें बड़ी हो गई हैं? आज भी ऐसा लगता है मानो कोई वर्ग विशेष एक ‘बीमारी’ है, जिसे छूने मात्र से खुद को श्रेष्ठ समझने वाला वर्ग अपवित्र हो जाएगा। 21वीं सदी में एक मासूम की जान सिर्फ इसलिए चली जाए क्योंकि उसका परिवार मंदिर की चौखट तक पहुंच गया यह हमारी सभ्यता पर एक काला धब्बा है। आखिर जाति क्या है और क्यों इसे इंसान की जान से ज्यादा महत्व दिया जा रहा है? यकीनन, अगर आज भगवान स्वयं इस धरती पर होते, तो वे उस मंदिर में कभी नहीं ठहरते जहां इंसानियत का लहू बहाया गया हो।

कैसे हुई ये दर्दनाक वारदात

तेलंगाना (Telangana) के नागरकुर्नूल जिले (Nagarkurnool District) से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। कुम्मेरा जात्रा के दौरान हुए एक कथित हमले में मात्र दो महीने की बच्ची की मौत हो गई। यह पूरा मामला गहरे जातीय भेदभाव और अमानवीय हिंसा का परिणाम बताया जा रहा है।

क्या है पूरा मामला

पीड़ित परिवार कुम्मेरा गांव (Kummera village) का रहने वाला है और पिछड़े ‘चकली समुदाय’ से संबंध रखता है। परिवार का आरोप है कि मंदिर में प्रवेश के लिए 100 रुपये देने से इनकार करने पर कुछ उच्च जाति के पुरुषों ने उन पर हमला कर दिया। परिवार का कहना है कि मंदिर में प्रवेश आमतौर पर मुफ्त होता है, लेकिन उनसे पैसे मांगे गए।

चिलुकेश्वरम चंद्रकला ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उन्हें नीची जाति कहकर अपमानित किया गया और विरोध करने पर मारपीट की गई। उनके अनुसार, हमला उस समय और बढ़ गया जब उनकी बहू ने दया की गुहार लगाते हुए शिशु को आरोपियों के पैरों में रख दिया और पति गणेश को पीटना बंद करने की विनती की। इसी दौरान बच्ची को चोट लग गई।

महिलाओं के साथ भी मारपीट का आरोप

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक परिवार का कहना है कि महिलाओं को बाल पकड़कर घसीटा गया और धातु की छड़ों से पीटा गया। घटना 18 फरवरी को हुई थी, लेकिन घायल बच्ची ने 21 फरवरी को दम तोड़ दिया।

विरोध प्रदर्शन और आरोप

परिवार ने धर्म समाज पार्टी (डीएसपी) के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर बच्ची के लिए न्याय की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी के नेता वी शिव महाराज ने आरोप लगाया कि परिवार को बंधुआ मजदूरी से इनकार करने की वजह से भी निशाना बनाया गया था और पहले भी उन्हें धमकियां मिलती रही थीं।

पुलिस की कार्रवाई

नागरकुर्नूल पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और जांच जारी है। शुरुआत में मामला संदिग्ध मौत, चोट पहुंचाने और अपमान से जुड़ी धाराओं में दर्ज किया गया था। बाद में यह सामने आने पर कि गणेश की पत्नी अनुसूचित जाति समुदाय से हैं, पुलिस ने हत्या के प्रयास और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार बताया जा रहा है कि बच्ची का पोस्टमार्टम कराया गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप

चंद्रकला ने दावा किया कि आरोपियों ने उनके बेटे गणेश पर नारियल तोड़ने वाली छड़ से हमला किया और महिलाओं को भीड़ के सामने फेंक दिया। परिवार ने सोने-चांदी के आभूषण और फोन छीने जाने का भी आरोप लगाया है। साथ ही धमकी दी गई कि गांव लौटने पर उनका घर गिरा दिया जाएगा। डर के कारण परिवार फिलहाल नागरकुर्नूल में शरण लेने को मजबूर है। वहीं, पुलिस ने बताया कि दूसरी पक्ष की शिकायत पर पीड़ित परिवार के खिलाफ भी एक जवाबी मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई होने की बात कही जा रही है।

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