UP Village Name Change: यूपी चुनाव से पहले दलित कार्ड? जातिसूचक गांवों के नाम बदलने की मुहिम ने पकड़ी रफ्तार

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UP Village Name Change: हाल ही में, दलितों से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें उत्तर प्रदेश के कई ऐसे दलित गांवों का नाम बदलने का प्रस्ताव रखा गया है, जिनके नाम दलित जातियों के नाम पर रखे गए हैं। वही सीएम योगी आदित्यानाथ ने इस मामले में अपनी हामी भर दी है।

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जाति के नाम पर गांव के नाम

दलितों को अक्सर उनकी जाति के आधार पर संबोधित या संदर्भित किया जाता है—यह कोई नई प्रथा नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही है। इसके अलावा, कई ऐसे गाँव भी हैं जिनका नाम दलित जातियों के नाम पर रखा गया है। जी हाँ, यूपी से ऐसी ही खबर सामने आई है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव होने है, लेकिन उससे पहले पक्ष हो या विपक्ष दलितो को साधने में लग गई है, ताजा मामला है दलितो के सम्मान को बनाये रखने के लिए उनकी जाति पर रखे नामों को बदलने की मांग की जा रही है। इसके लिए बीजेपी (BJPके विधान परिषद सदस्य एमएलसी लालजी प्रसाद निर्मल (MLC Lalji Prasad Nirmal) ने सीएम योगी आदित्यानाथ (CM Yogi Adityanath) को एक लिस्ट सौंपते हुए कहा कि जाति के नाम पर गांव के नाम रखना उनका अपमान करने जैसा है. जो कि जातिसूचक शब्दों के उच्चारण की तरह है इसलिए ये नाम बदले जाने चाहिए।

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कार्यकर्तोओ ने भी नाम बदलने का आग्रह किया

इसके लिए बहुजन सशक्तिकरण संघ (बीएसएस)  के कार्यकर्तोओ ने भी नाम बदलने का आग्रह किया है। इन गांवो में  चमारी, चमरौआ, चमेड़, चमारसेना, चमरौली, भँगियाना, चमरौआ, चमरन खेड़ा और नटपुरवा जैसे नाम वाले गांव शामिल है। उन्होंने कहा कि इस तरह के नाम समाज के बड़े वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और उनका मनोबल गिराने के लिए किया जाता है, ताकि उनकी पहचान हमेशा नीचे तबके की ही रहे।

उन्होंने सीएम से मांग की है कि इन गांवो के सम्मानजनक नाम रखे जायें, और भविष्य में कोई इनके जातिगत नाम से बुलाता हो तो उस पर एससी एसटी एक्ट (SC-ST ACT) लगाया जायें। चुनाव से पहले दलितो को साधने का ये तरीका वाकई में काफी अच्छा है, लेकिन देखना ये होगा कि सीएम का इस मामले में क्या फैसला आता है.. और इसका चुनाव में कितना फायदा होगा।

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