Maharajganj news: हाल ही में, उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के महराजगंज (Maharajganj) जिले में एक दलित छात्रावास (Dalit Hostel) में आरक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. यहां के अनुसूचित जाति और जनजाति (SC-ST) के छात्रों ने मांग की है कि छात्रावास में सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए निर्धारित 30% आरक्षण कोटा रद्द किया जाए. जिसे लेकर विवाद शुरू हो गया है. तो चलिए आपको इस लेख में पूरे मामले के बारे में विस्तार से बताते हैं.
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30 प्रतिशत आरक्षण को लेकर लोगों ने विरोध
बीते दिन उत्तर प्रदेश के महाराज गंज से हैरान परेशान करने वाली खबर सामने आई है, जहां समाज कल्याण विभाग में एससी-एसटी (SC-ST) वर्ग के छात्रावास को मिले 30 प्रतिशत आरक्षण को लेकर लोगों ने विरोध करना शुरु कर दिया है. दरअसल, हिंदूवादी सामाजिक संगठनों और कुछ छात्रों ने मिलकर समाज कल्याण अधिकारी को ज्ञापन सौप कर मांग की है कि छात्रावास के 30 प्रतिशत आवंटित आरक्षण को समाप्त कर दिया जाए.
संगठन का तर्क है कि ये छात्रावास गरीबी और मुश्किलों से गुजर रहे छात्रों के लिए बनाया गया था और ऐसे में वो किसी भी जाति का हो सकता है लेकिन 30 प्रतिशत केवल दलित छात्र के लिए आवंटित होने के कारण जरूरतमंद छात्र भी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं. हालांकि, इस आरक्षण को पहले 2011 में हटाया गया था लेकिन 2013 में इसे फिर से लागू कर दिया गया लेकिन एक बार फिर से ऐसी मांग उठी है कि दलित आरक्षित हटा देना चाहिए.
दलित का अधिकार छिन रहे
इसके अलवा छात्रों का कहना है कि इन लोगों की नियुक्ति विशेष जाति और जनजाति के छात्रों के लिए की गई थी, ताकि उन्हें पर्यावरण और विशेषज्ञता हासिल हो सके. छात्रों का आरोप है कि 30% आरक्षण लागू होने से उनके टिकटों की संख्या कम हो गई है, जिससे उनके अधिकार छिन रहे हैं. छात्रों का कहना है कि यह न तो संवैधानिक रूप से सही है और न ही उचित.
हिंदूवादी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर इसे नहीं हटाया गया तो वे आंदोलन करेंगे. ऐसे में यह समझ से बाहर है कि दलित छात्रों के लिए आरक्षित कमरों से आरक्षण हटाने के पीछे क्या मंशा छिपी है…या मनुवादी संगठन ये चाहते ही नहीं हैं कि दलितों को उनके अधिकार मिलें. छात्रों ने इस संबंध में जिला मजिस्ट्रेट (DM) को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें उन्होंने 30% आरक्षण आदेश को तत्काल रद्द करने की मांग की है.



